अंतरराष्ट्रीय पटल पर चमका भारतीय योग, अंशप्रीत सैनी ने कॉलोनी वासियों को कराया अभ्यास
Jun 20, 2026 3:36 PM
यमुनानगर। (संजीव चौहान) 'स्वस्थ आयु के लिए योग' के वैश्विक संकल्प के साथ आज पूरा जिला योग के रंग में रंगा नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर सुबह से ही पार्कों, मैदानों और शैक्षणिक संस्थानों में योग सत्रों की धूम है। इस बीच, स्वामी विवेकानंद योग संस्थान से जुड़े शहर के एक स्थानीय परिवार की चर्चा हर जुबान पर है। इस परिवार के सभी सदस्य न सिर्फ खुद योग को अपनी दिनचर्या बना चुके हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को इससे जोड़ने के अभियान में जी-जान से जुटे हैं।
योग से ही होगा स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण: अंशप्रीत सैनी
इस अभियान की अगुवाई कर रही हैं परिवार की सबसे कम उम्र की योग शिक्षिका अंशप्रीत सैनी। अंशप्रीत ने अपनी कॉलोनी के निवासियों को इकट्ठा कर आयुष मंत्रालय के निर्धारित योग प्रोटोकॉल के अनुसार योगासन करवाए और उनके वैज्ञानिक लाभ भी समझाए। अंशप्रीत का मानना है कि एक मजबूत और स्वस्थ राष्ट्र के निर्माण के लिए हर नागरिक का मानसिक व शारीरिक रूप से फिट होना जरूरी है। योग न केवल शरीर को निरोगी रखता है, बल्कि एकाग्रता बढ़ाकर मानसिक विकास में भी अद्भुत भूमिका निभाता है।
बच्चों को संस्कार के साथ दें योग की शिक्षा: डॉ. शिव कुमार
अंशप्रीत के पिता डॉ. शिव कुमार सैनी और माता निशा सैनी ने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और गैजेट्स के बढ़ते चलन के बीच बच्चों को योग के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा, "नियमित योग और ध्यान लगाने से जीवन में एक सकारात्मक व नई ऊर्जा का प्रवाह होता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को बचपन से ही इसका अभ्यास करवाएं।" सैनी परिवार ने बताया कि यदि क्षेत्र में कोई भी व्यक्ति योग सीखना चाहता है, तो उनका द्वार हमेशा खुला है। पिछले कई वर्षों से यह परिवार बिना किसी स्वार्थ के योग की अलख जगा रहा है।
सदियों पुरानी भारतीय परंपरा का वैश्विक स्तर पर लोहा
पत्रकारों से बातचीत में योग साधकों ने कहा कि योग भारत की ऋषि परंपरा की वह अमूल्य धरोहर है, जिसे आज समूचा विश्व नमन कर रहा है। कभी कंदराओं और आश्रमों तक सीमित रहने वाली यह विधा आज अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी प्रासंगिकता सिद्ध कर चुकी है। आधुनिक जीवनशैली के विकारों से मुक्ति पाने के लिए दुनिया के कोने-कोने में लोग अब योग को एक जीवन पद्धति के रूप में स्वीकार कर रहे हैं।