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बाजार के खाने पर नो-एंट्री, घर के स्वाद से रिश्तों में मिठास घोल रहे PNB के रिटायर्ड अधिकारी

Jun 19, 2026 2:13 PM

यमुनानगर (संजीव चौहान) आज के इस भागदौड़ भरे दौर में जहां युवा पीढ़ी मोबाइल स्क्रीन और अपनी निजी व्यस्तताओं में सिमटती जा रही है, वहीं कुरुक्षेत्र के बुजुर्गों ने समाज को एक नई राह दिखाने का बीड़ा उठाया है। आल इंडिया पंजाब नेशनल बैंक पेंशनर्स एंड रिटायरीज एसोसिएशन ने एक ऐसी मुहिम की शुरुआत की है, जो न सिर्फ रिटायर्ड कर्मचारियों को एक मंच पर लाएगी, बल्कि उनके बच्चों और पोते-पोतियों को भी भारतीय संस्कृति और संयुक्त परिवार के मूल्यों से रूबरू कराएगी।

घर की रसोई के स्वाद से घुलेगी रिश्तों में मिठास

एसोसिएशन के केंद्रीय संगठन सचिव आर.के. वोहरा ने इस अनूठी पहल की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि काफी सोच-विचार के बाद इस पारिवारिक समूह का ताना-बाना बुना गया है। इस ग्रुप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बाजार के बने रेडीमेड खाने या फास्ट फूड पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी। बैठक में शामिल होने वाला हर परिवार अपने घर की रसोई से तैयार स्नैक्स या सब्जी-पूरी साथ लाएगा। वोहरा के मुताबिक, जब सब मिलकर घर का बना खाना साझा करेंगे, तो आपसी अपनत्व और पारिवारिक भावना को एक नया विस्तार मिलेगा।

सिमरन से शुरुआत, अनुभवों का होगा आदान-प्रदान

तय रणनीति के अनुसार, यह बैठक हर महीने एक सदस्य के घर पर आयोजित की जाएगी। कार्यक्रम की शुरुआत तय समय पर भगवान के सिमरन (प्रार्थना) के साथ होगी, जिसके बाद बुजुर्ग अपने जीवन के अनुभवों को बच्चों के साथ साझा करेंगे। आर.के. वोहरा ने कहा, "हमारा मकसद सिर्फ आपस में मिलना-जुलना नहीं है। हम चाहते हैं कि जिस घर में बैठक हो, उस परिवार के बहू-बेटे और नाती-पोते भी इसमें लाजमी तौर पर बैठें। जब बच्चे बड़ों के संघर्ष और उनके अनुभव सुनेंगे, तो उनमें परिवार के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की भावना खुद-ब-खुद मजबूत होगी।"

लांबा परिवार के घर सजी महफिल, बहू भावना बोलीं— 'हर 15 दिन में हो ऐसा आयोजन'

इसी कड़ी में पहली किटी का शानदार आयोजन एसोसिएशन के वरिष्ठ सदस्य एच.एस. लांबा के निवास स्थान पर किया गया। इस बैठक में आठ रिटायर्ड अधिकारियों के परिवारों ने शिरकत की। लांबा परिवार के बेटे दिवजोत लांबा, पुत्रवधू भावना, बेटी गुनीत और दोहित्री कैवलीन व उसतत ने इस पारिवारिक मिलन का भरपूर आनंद लिया। बुजुर्गों के बीच वक्त बिताने के बाद भावुक हुई पुत्रवधू भावना ने कहा कि आज के समय में ऐसे आयोजन बेहद जरूरी हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे महीने के बजाय हर 15 दिन में आयोजित किया जाना चाहिए ताकि नई पीढ़ी को सांझा परिवार (संयुक्त परिवार) की असली ताकत और उसकी अहमियत का अहसास हो सके।

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