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यमुनानगर पर जलभराव का संकट: 192 किलोमीटर लंबा नाला नेटवर्क कूड़े से चोक, निगम की सफाई योजना ठप

May 21, 2026 11:07 AM

यमुनानगर। यमुनानगर-जगाधरी ट्विन सिटी को इस बार मानसून में जलभराव के नरक से बचाने के तमाम सरकारी दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। आसमान में बादल घिरने से पहले ही शहर के नालों की जर्जर स्थिति देखकर स्थानीय निवासियों की चिंताएं सातवें आसमान पर हैं। नगर निगम क्षेत्र के तहत आने वाले करीब 58 किलोमीटर लंबे 32 बड़े और मध्यम आकार के नालों के साथ-साथ 134 किलोमीटर लंबाई वाली 340 छोटी ड्रेनों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। ड्रेनेज सिस्टम इस कदर चोक हो चुका है कि नालों का गंदा पानी आगे बढ़ने के बजाय एक ही जगह सड़ रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि नगर निगम ने इस बार पहली बार छोटी नालियों की सफाई की बड़ी योजना तो तैयार की, लेकिन यह योजना प्रशासनिक फाइलों से बाहर निकलकर धरातल पर नहीं उतर सकी है।

इन इलाकों पर मंडराया डूबने का खतरा, पिछले साल के जख्म अभी भी हरे

नगर निगम के खुद के रिकॉर्ड के मुताबिक, वार्ड नंबर एक से लेकर सात तक का पूरा बेल्ट बेहद संवेदनशील जोन में आता है। पिछले साल मानसून के दौरान जगाधरी के मटका चौक, मुख्य बस स्टैंड और अशोक विहार कॉलोनी सहित कई पॉश इलाकों में नाव चलने जैसे हालात पैदा हो गए थे। इस बार भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। पटरी मोहल्ला नाला, मेट्रो मोटर नाला, शिबू मेटल नाला और हनुमान गेट से धीरमल व कुंडी तालाब तक के प्रमुख नालों में प्लास्टिक और मलबे का पहाड़ खड़ा है। यही आलम प्रकाश चौक से त्रिकोणी और गौरी शंकर मंदिर तक जाने वाले नालों का है। इसके अलावा गुलाब पार्क, पाबनी रोड, जेल रोड, संत थॉमस स्कूल और पत्थरवाला बाजार जैसे व्यापारिक और रिहायशी क्षेत्रों में नालों की सफाई न होने से मानसून की एक ही बारिश पूरे शहर को जलमग्न कर सकती है। अंबाला रोड पर एचडीएफसी बैंक के पास की पुलिया और छोटी लाइन क्षेत्र के नाले भी इस समय पूरी तरह ब्लॉक हैं।

"घरों में बैठना हुआ दूभर", सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति का आरोप

नालों में जमा भारी प्लास्टिक और कचरे के कारण पानी का नेचुरल फ्लो पूरी तरह रुक गया है। प्रकाश चौक, गंगा नगर कॉलोनी, प्रोफेसर कॉलोनी, लाजपत नगर, आजाद नगर, विष्णु नगर और खालसा कॉलेज रोड के मुख्य नालों से उठने वाली भयंकर दुर्गंध ने लोगों का दम घोंट रखा है। स्थानीय निवासी सत्यवान, सतीश और जोगिंद्र ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि सुबह और शाम के वक्त हवा चलने पर बदबू इस कदर बढ़ जाती है कि घरों के खिड़की-दरवाजे बंद करने पड़ते हैं। लोगों का सीधा आरोप है कि नगर निगम को बार-बार शिकायतें देने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। सफाई कर्मचारी आते जरूर हैं, लेकिन वे नालों के ऊपर-ऊपर से कचरा हटाकर औपचारिकता पूरी कर लेते हैं, जबकि नालों के तल में बैठी भारी गाद (स्लज) को नहीं निकाला जा रहा, जो जलभराव की सबसे मुख्य वजह है।

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