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UHBVN की लापरवाही पर अदालत सख्त: यमुनानगर में किसान के 30 हजार रुपये ब्याज सहित लौटाने के आदेश

May 22, 2026 1:39 PM

यमुनानगर। यमुनानगर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने सरकारी महकमों में फाइलों को अटकाकर बैठने और आम जनता को परेशान करने की प्रवृत्ति पर बेहद सख्त टिप्पणी की है। उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (UHBVN) की ढुलमुल कार्यप्रणाली से तंग आ चुके एक स्थानीय किसान को न्याय देते हुए आयोग ने बिजली बोर्ड को तगड़ा झटका दिया है। अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि एक सरकारी संस्था होने के नाते निगम को जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए था, लेकिन यहाँ उपभोक्ता को जानबूझकर लंबे समय तक परेशान रखा गया। यमुनानगर कोर्ट के इस फैसले के बाद उन तमाम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है जो बिजली दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुके हैं।

सालों तक नहीं मिला ट्यूबवेल कनेक्शन, रिफंड मांगने पर भी दफ्तर ने किया टालमटोल

पूरा मामला यमुनानगर के ग्रामीण अंचल से जुड़ा है, जहाँ एक किसान ने अपनी खेती की सिंचाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कृषि ट्यूबवेल कनेक्शन का आवेदन किया था। बिजली निगम के नियमों के मुताबिक किसान ने निर्धारित सिक्योरिटी और सहमति राशि भी तुरंत काउंटर पर जमा करवा दी थी। किसान को उम्मीद थी कि जल्द ही उसके खेतों तक बिजली पहुंच जाएगी, लेकिन साल दर साल बीतते चले गए और यमुनानगर बिजली विभाग के अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। सालों के लंबे इंतजार के बाद जब किसान ने थक-हारकर अपना आवेदन वापस लेते हुए जमा राशि रिफंड करने की गुहार लगाई, तो विभाग ने उस फाइल को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया।

'अगर पैसे लौटाने की नीयत साफ थी, तो महीनों तक फाइल क्यों दबाए रखी?'

यह मामला जब यमुनानगर उपभोक्ता आयोग की दहलीज पर पहुंचा, तो बिजली निगम के अधिकारियों ने कोर्ट में यह दलील दी कि रिफंड का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है और मंजूरी आते ही भुगतान कर दिया जाएगा। निगम ने दावा किया कि वे राशि लौटाने के लिए तैयार हैं। हालांकि, आयोग की पीठ ने जब दस्तावेजों को खंगाला, तो अधिकारियों की सुस्ती पूरी तरह उजागर हो गई। अदालत ने पाया कि निगम ने कागजी औपचारिकता पूरी करने के नाम पर महीनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि यदि निगम वास्तव में राशि लौटाने को तैयार था, तो उसने अब तक भुगतान क्यों नहीं किया? इसे सीधे तौर पर उपभोक्ता के हितों की अनदेखी माना गया।

भारी जुर्माने के साथ अल्टीमेटम, ढिलाई बरती तो लगेगा अतिरिक्त ब्याज

यमुनानगर उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि विभाग की इस घोर लापरवाही के कारण किसान को मानसिक परेशानी, आर्थिक नुकसान और अनावश्यक कानूनी मुकदमों का बोझ उठाना पड़ा, जिसे समय पर की गई कार्रवाई से आसानी से टाला जा सकता था। अदालत ने UHBVN को कड़ा निर्देश दिया है कि वह पीड़ित किसान की पूरी मूल राशि को तय तारीख से 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस करे। इसके साथ ही, किसान को हुई मानसिक पीड़ा और अदालती खर्च के हर्जाने के तौर पर 11 हजार रुपये का मुआवजा अलग से दिया जाए। आयोग ने इस पूरे आदेश को तामिल करने के लिए 45 दिन का वक्त मुकर्रर किया है; यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं हुआ, तो निगम को 9 फीसदी की दर से भारी ब्याज चुकाना होगा।

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