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यमुनानगर में किसानों का हल्लाबोल: जगाधरी मंडी से सचिवालय तक निकाला मार्च, मुआवजा नीति को बताया किसान विरोधी

May 25, 2026 1:22 PM

यमुनानगर। यमुनानगर जिले में सोमवार को किसानों और भूमि मालिकों ने सरकार की नई भूमि अधिग्रहण व ट्रांसमिशन लाइन मुआवजा नीति के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भारतीय किसान यूनियन के आह्वान पर जिलेभर के किसान सुबह ही जगाधरी की नई अनाज मंडी में इकट्ठा होना शुरू हो गए थे। मंडी में आयोजित एक विरोध सभा के दौरान वक्ताओं ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। किसानों का सीधा आरोप है कि सरकार की 29 अप्रैल 2026 को जारी की गई नई अधिसूचना पूरी तरह से किसान विरोधी है। इसके बाद किसानों ने मंडी से लेकर लघु सचिवालय तक पैदल रोष मार्च निकाला, जिससे कुछ समय के लिए शहर की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। सचिवालय पहुंचकर किसानों ने गेट पर ही धरना दे दिया और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा।

'पावर कंपनियों को फायदा पहुंचाने का खेल'— भाकियू का सीधा आरोप

किसानों का मुख्य विरोध ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाओं के लिए होने वाले भूमि अधिग्रहण और राइट ऑफ वे (RoW) के तहत तय किए गए नए मुआवजा नियमों को लेकर है। किसानों का कहना है कि इस नए कानून के आने से प्रभावित किसानों को उनकी बेशकीमती जमीन का सही और वाजिब दाम नहीं मिल पाएगा।

भाकियू नेता हरपाल सिंह ने तीखे शब्दों में कहा, "सरकार ने इस अधिसूचना को लाते समय पारदर्शिता को पूरी तरह ताक पर रख दिया है। बाजार मूल्य तय करने की जो नई प्रक्रिया बनाई गई है, वह सिर्फ और सिर्फ पावर ग्रिड, एचवीपीएनएल (HVPNL) और दूसरी निजी ट्रांसमिशन कंपनियों की जेबें भरने के लिए है। हम इस नीति को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।" उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस 29 अप्रैल वाली अधिसूचना को तुरंत रद्दी की टोकरी में फेंका जाए।

'पूरे सूबे में हो एक समान मुआवजा नीति'— भागीदारी पर अड़े किसान

लघु सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे किसानों ने साफ किया कि अब लड़ाई आर-पार की होगी। किसानों की प्रमुख मांगों में यह बात शामिल है कि मुआवजा तय करने वाली किसी भी कमेटी में प्रभावित किसानों को भी बकायदा जगह मिलनी चाहिए। इसके साथ ही, हरियाणा के सभी जिलों में मुआवजे की दरें अलग-अलग होने के बजाय एक समान नीति लागू की जानी चाहिए। किसानों ने मांग उठाई है कि इस विवाद को सुलझाने के लिए एक स्वतंत्र समीक्षा समिति बनाई जाए, जिसमें सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ता और किसान प्रतिनिधि भी शामिल हों, ताकि जमीन का दाम भविष्य की विकास संभावनाओं को देखकर तय हो।

किसी भी हद तक जाने की चेतावनी, आंदोलन तेज करने का अल्टीमेटम

सचिवालय के सामने घंटों चले इस प्रदर्शन के बाद किसान नेताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों को दोटूक लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन तो महज एक ट्रेलर है। अगर खट्टर-सैनी सरकार ने इस अधिसूचना को वापस नहीं लिया और किसानों की मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो इस आंदोलन की आग सिर्फ यमुनानगर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा। किसान नेताओं ने साफ किया कि अपनी पुश्तैनी जमीनों के हक और अधिकारों की रक्षा के लिए देश का अन्नदाता एक बार फिर किसी भी स्तर के संघर्ष और बड़े आंदोलन के लिए मानसिक रूप से तैयार हो चुका है।

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