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यमुनानगर में सीएम फ्लाइंग का बड़ा एक्शन, अवैध खनन का पर्दाफाश

May 28, 2026 10:38 AM

यमुनानगर। हरियाणा के यमुनानगर जिले से लगते सीमावर्ती इलाकों में अवैध माइनिंग का नेटवर्क किस कदर पैर पसार चुका है, इसकी बानगी ताजेवाला गांव में देखने को मिली है। गुप्त सूचना के आधार पर तड़के पहुंची सीएम फ्लाइंग की टीम ने जब गांव की पंचायती जमीन पर छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। मौके पर न सिर्फ अवैध खनन किए जाने के पुख्ता निशान मिले, बल्कि भारी मात्रा में पत्थरों का अवैध स्टॉक भी बरामद किया गया है। इस औचक कार्रवाई से पूरे माइनिंग बेल्ट और प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया है।

अफसरों के कड़े तेवर: सरपंच और पंचायत की भूमिका संदिग्ध

मौके पर मौजूद सीएम फ्लाइंग के इंचार्ज राजेश कुमार ने सीधे शब्दों में कहा कि सरकारी और पंचायती जमीन का इस्तेमाल इस तरह की अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था, जिसके स्पष्ट प्रमाण टीम के हाथ लगे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब स्थानीय प्रशासन भी हरकत में आ गया है। बीडीपीओ (BDPO) कार्तिक चौहान ने साफ किया है कि इस पंचायती जमीन की जल्द ही पैमाइश और निशानदेही कराई जाएगी। उन्होंने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि गांव के भीतर अवैध माइनिंग को रोकने की सीधी और प्राथमिक जिम्मेदारी सरपंच की होती है, ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम में पंचायत की भूमिका की भी गहनता से जांच होगी।

आरोपों पर सरपंच प्रतिनिधि का पलटवार: 'मैंने खुद दर्ज कराए हैं मुकदमे'

दूसरी तरफ, इन गंभीर आरोपों और पंचायत को कटघरे में खड़ा किए जाने पर सरपंच प्रतिनिधि जाकिर ने अपनी सफाई पेश की है। जाकिर इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए दावा कर रहे हैं कि गांव में जब भी कहीं अवैध माइनिंग की सुगबुगाहट हुई, उसकी शिकायत उन्होंने खुद प्रशासन को दी और कई मामले भी दर्ज करवाए। उनका कहना है कि सरकारी जमीन पर मिला यह पत्थरों का जखीरा किसका है और इसे यहाँ किसने डंप किया, इस बात की पंचायत को कानों-कान खबर नहीं थी।

बयानबाजी से आगे क्या बड़े मगरमच्छों पर होगा एक्शन?

ताजेवाला और इसके आस-पास के नदी-नालों में अवैध खनन की शिकायतें नई नहीं हैं, लेकिन हर बार स्थानीय स्तर पर सांठगांठ के चलते मामला दब जाता था। इस बार सीधे मुख्यमंत्री की उड़नदस्ते (सीएम फ्लाइंग) की दखल ने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि अगर पंचायत बेखबर थी, तो आखिर किसकी शह पर सरकारी सरजमीं का सीना चीरकर पत्थरों का इतना बड़ा स्टॉक वहां खड़ा कर दिया गया? देखना होगा कि जिला प्रशासन इस बार केवल कागजी कार्रवाई और बयानों तक सीमित रहता है, या फिर माइनिंग सिंडिकेट के असली सरगनाओं तक पुलिस के हाथ पहुंचते हैं।

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