यमुनानगर में 2000 मेडिकल स्टोर बंद, ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के खिलाफ सड़कों पर उतरे व्यापारी
May 20, 2026 2:40 PM
यमुनानगर। ऑनलाइन दवा कंपनियों (ई-फार्मेसी) के बढ़ते दखल और सरकारी नीतियों के विरोध में बुधवार को यमुनानगर जिले की स्वास्थ्य सेवाएं एक अलग ही संकट से जूझती नजर आईं। ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट्स के देशव्यापी बंद के आह्वान पर जिले के तमाम दवा विक्रेताओं ने अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखीं। सुबह से ही शहर के करीब दो हजार मेडिकल स्टोरों पर ताले लटके रहे। इस एक दिवसीय हड़ताल के कारण जगाधरी और यमुनानगर के सुदूर ग्रामीण अंचलों तक में तीमारदारों को आपातकालीन दवाओं के लिए भटकना पड़ा।
जगाधरी सिविल अस्पताल पर प्रदर्शन, विधायक को घेरा
बुधवार सुबह जिलेभर से आए दवा व्यापारी जगाधरी के सिविल अस्पताल परिसर के बाहर इकट्ठा हुए। यहां केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई, जिसके बाद केमिस्टों ने मुख्य सड़कों पर एक रोष मार्च निकाला। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एसोसिएशन के जिला प्रधान मनीष शर्मा की अगुवाई में यह जत्था स्थानीय विधायक घनश्याम अरोड़ा के निवास स्थान पर पहुंचा। केमिस्टों ने विधायक के माध्यम से सरकार के नाम एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा, जिसमें ऑनलाइन दवा बिक्री पर तुरंत पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
'ऑनलाइन' के चक्कर में बढ़ रहा है नशे का कारोबार
एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष मनीष शर्मा ने ई-फार्मेसी के स्याह पहलू को उजागर करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन माध्यमों से दवाओं की डिलीवरी होने के कारण ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। बिना किसी डॉक्टर की प्रामाणिक पर्ची या पुरानी-फर्जी पर्चियों के आधार पर ऐसी दवाएं लोगों के घरों तक पहुंच रही हैं, जिनका इस्तेमाल नशे या कफ सिरप के दुरुपयोग के रूप में किया जा रहा है। इसके अलावा, दवाओं को एक निश्चित तापमान (कोल्ड चेन) पर स्टोर करना अनिवार्य होता है, जिसका ऑनलाइन कूरियर व्यवस्था में कोई ध्यान नहीं रखा जाता। इससे दवाओं की प्रभावशीलता खत्म हो रही है और वे जहर का काम कर रही हैं।
कॉरपोरेट कंपनियों के 'डिस्काउंट' से छोटे दुकानदार तबाह
हड़ताल पर बैठे केमिस्टों का गुस्सा उन बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों पर भी फूटा जो पूंजी के दम पर बाजार पर एकाधिकार जमाना चाहती हैं। दवा विक्रेताओं का कहना है कि ये कंपनियां भारी-भरकम डिस्काउंट (Predatory Pricing) देकर ग्राहकों को लुभा रही हैं, जिससे पुश्तैनी रूप से यह काम कर रहे छोटे और मध्यम दर्जे के दुकानदार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। कोविड काल के दौरान दी गई कुछ ढील का अब ये कंपनियां नाजायज फायदा उठा रही हैं। केमिस्ट नेताओं ने दोटूक चेतावनी दी कि दवा कोई परचून का सामान नहीं है, यह सीधे इंसान की जिंदगी से जुड़ा मसला है। अगर सरकार ने जल्द ही इस अवैध ऑनलाइन कारोबार पर रोक नहीं लगाई, तो यह आंदोलन अनिश्चितकालीन हड़ताल में तब्दील हो जाएगा।