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यमुनानगर में अवैध पार्किंग पर सख्त हुईं DC प्रीति, 7 दिन में बेसमेंट खाली नहीं किए तो चलेगा निगम का पीला पंजा

May 17, 2026 11:34 AM

यमुनानगर। यमुनानगर शहर की लाइफलाइन कही जाने वाली सड़कों को जाम के झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। नगर निगम के नियमों को ठेंगा दिखाकर बनाए गए व्यावसायिक भवनों और सड़कों पर अतिक्रमण करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का खाका खींच लिया गया है। उपायुक्त प्रीति ने नगर निगम की टीम को स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि शहर के उन सभी बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, होटलों और अस्पतालों को चिन्हित कर एक सप्ताह का फाइनल नोटिस थमाया जाए, जिन्होंने अपने यहाँ आने वाले ग्राहकों के लिए पार्किंग का कोई बंदोबस्त नहीं किया है। साफ कर दिया गया है कि सात दिन की मोहलत खत्म होते ही बिना किसी पैरवी और दबाव के सीधे तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

कागजी नक्शों की खुली पोल, बेसमेंट में पार्किंग की जगह सज रहे दफ्तर

शहरी विकास और निगम के नियमों के मुताबिक किसी भी व्यावसायिक गतिविधि के लिए भवन निर्माण के समय पार्किंग स्पेस दिखाना अनिवार्य होता है। लेकिन यमुनानगर के सबसे व्यस्त बाजारों की जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। शहर के रसूखदार बिल्डरों और व्यापारियों ने नक्शा पास कराते वक्त तो बेसमेंट में पार्किंग की जगह दिखाई, लेकिन इमारत खड़ी होते ही मोटी कमाई के चक्कर में उस जगह को दफ्तरों, गोदामों या दुकानों में तब्दील कर दिया। इसके अलावा, यमुनानगर और जगाधरी के बीच ऐसे अवैध भवनों की भी एक लंबी फेहरिस्त है, जो बिना किसी प्रशासनिक मंजूरी (अप्रूव्ड मैप) के धड़ल्ले से बनकर तैयार हो गए और आज वहां से बेरोकटोक व्यापारिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं।

महाराजा अग्रसेन चौक से स्टेशन रोड तक रेंगती हैं गाड़ियां, एम्बुलेंस का निकलना भी दूभर

प्रशासन की इस नई और सख्त मुहिम के केंद्र में जगाधरी का महाराजा अग्रसेन चौक से लेकर रेलवे स्टेशन रोड तक का पूरा इलाका है। यह पूरा स्ट्रेच आर्थिक और व्यावसायिक लिहाज से शहर का दिल माना जाता है। यहाँ रोजाना हजारों की तादाद में लोगों की आवाजाही होती है। मॉल, कोचिंग सेंटर और निजी अस्पतालों में आने वाले लोग मजबूरन अपनी गाड़ियां और दोपहिया वाहन मुख्य सड़क के दोनों तरफ खड़े कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि चौड़ी सड़कें संकरी गलियों में तब्दील हो जाती हैं। स्थिति इतनी भयावह रूप ले चुकी है कि जिला नागरिक अस्पताल के गेट से लेकर रामपुरा कॉलोनी और मधु चौक तक गाड़ियां रेंगती हुई नजर आती हैं। कई मर्तबा तो गंभीर मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन गाड़ियां भी इस बेतरतीब जाम में घंटों फंसी रहती हैं।

मार्च के नोटिसों को हवा में उड़ाया, अब सीधे एक्शन की तैयारी में निगम

ऐसा नहीं है कि विभाग ने यह कदम अचानक उठाया है। इससे पहले मार्च महीने में भी निगम ने शहर के कई बड़े प्रतिष्ठानों को अपनी पार्किंग व्यवस्था दुरुस्त करने और सड़कों से गाड़ियां हटाने के कड़े नोटिस जारी किए थे। लेकिन बड़े व्यापारियों और भवन मालिकों ने इन नोटिसों को ठंडे बस्ते में डाल दिया और हालात जस के तस बने रहे। इस कारण आम राहगीरों और दुकानदारों के बीच आए दिन सड़क पर ही मारपीट और गाली-गलौज की नौबत आ जाती है।

नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इस बार सिर्फ कागजी खानापूर्ति नहीं होगी। जिन भवनों में अवैध रूप से बेसमेंट को ब्लॉक किया गया है या पार्किंग एरिया में अवैध निर्माण किया गया है, उन्हें इस हफ्ते नोटिस थमा दिए जाएंगे। नोटिस की मियाद खत्म होने के अगले ही दिन निगम का दस्ता भारी पुलिस बल और पोकलेन मशीनों के साथ सड़क पर उतरेगा, और उन सभी अवैध हिस्सों को जमींदोज कर दिया जाएगा जो शहर के विकास और सुरक्षा में रोड़ा बने हुए हैं।

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