करोड़ों का चावल डकारने वाले मिलर पर बड़ा एक्शन, 3 जून को बिकेगी करोड़ों की संपत्ति
May 27, 2026 10:42 AM
यमुनानगर। हरियाणा के यमुनानगर में सरकारी धान का उठाव कर चावल दबाने वाले मिलर्स के खिलाफ प्रशासन अब आर-पार के मूड में आ चुका है। करोड़ों रुपये के चावल घोटाले में नामजद आरोपी राइस मिल संचालक जावेद खान की संपत्ति को बेचकर अब विभाग अपने नुकसान की भरपाई करने जा रहा है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने आरोपी की कुर्क की जा चुकी दोनों राइस मिलों को खुले बाजार में नीलाम करने का पूरा खाका तैयार कर लिया है। आगामी 3 जून को इस नीलामी की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा।
1.79 करोड़ रुपये की रिजर्व प्राइस तय
विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी राइस मिल संचालक की कुल 39.4 कनाल जमीन सरकारी एजेंसियों के पास बंधक पड़ी है। इसमें से फिलहाल उस 14 कनाल 10 मरले भूमि पर कब्जा लिया गया है, जहां पर मिल की भारी-भरकम मशीनरी लगी हुई है। इस नीलामी में न्यू किसान राइस मिल और किसान राइस मिल की जमीन के साथ-साथ वहां मौजूद बड़े शैड, ड्रायर, प्लांट और मशीनरी को भी बेचा जाएगा। इसके लिए विभाग ने बाकायदा 1.79 करोड़ रुपये का बेस (रिजर्व) प्राइस तय कर दिया है।
जांच में खुली धांधली की पोल, गायब मिला सरकारी स्टॉक
इस पूरे खेल की परतें तब खुलीं जब पिछले साल विभागीय टीमों ने मिलों का औचक निरीक्षण किया था। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के निरीक्षक विभु गोयल ने बताया कि खरीफ सीजन में गांव पोंटी स्थित न्यू किसान राइस मिल को कुल 44,900 क्विंटल से अधिक धान सरकारी कोटे से दिया गया था। नियम के मुताबिक मिलर को इसके बदले भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदामों में तय समय सीमा के भीतर 30,083 क्विंटल चावल जमा कराना था। लेकिन तय तारीख बीतने के बाद भी मिलर ने 6,629 क्विंटल से ज्यादा चावल रोक लिया। जब 16 सितंबर को फिजिकल वेरिफिकेशन हुआ, तो मिल से भारी मात्रा में चावल का स्टॉक ही गायब मिला। इसके बाद अक्टूबर 2025 में थाना सदर जगाधरी में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
आम जनता की जेब और हैफेड पर भी पड़ा असर
यह घोटाला सिर्फ खाद्य आपूर्ति विभाग तक ही सीमित नहीं है। सरकारी खरीद एजेंसी हैफेड (HAFED) ने भी आरोपी की दूसरी मिल 'किसान राइस मिल' पर अलग से शिकंजा कसा हुआ है। हैफेड के मुताबिक, इस मिल की तरफ भी 9,994 क्विंटल चावल बकाया है, जिसकी मौजूदा बाजार कीमत लगभग 4.57 करोड़ रुपये बैठती है। सरकारी अनाज की इस तरह हेराफेरी का सीधा असर आम जनता के राशन और टैक्स के पैसों पर पड़ता है। अधिकारियों का साफ कहना है कि जनता के पैसे की रिकवरी के लिए कुर्की के बाद अब नीलामी ही एकमात्र रास्ता बची थी, जिसके लिए मुनादी शुरू करवा दी गई है।