पंचायती जमीन पर चला प्रशासन का पीला पंजा, बीडीपीओ की मौजूदगी में ढहाए गए अवैध मकान
May 31, 2026 12:08 PM
यमुनानगर। यमुनानगर के छछरौली ब्लॉक के तहत आने वाले गांव तिहानो में सरकारी और पंचायती जमीनों पर अवैध कब्जेदारों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। गली की पंचायती जमीन को मुक्त कराने के लिए प्रशासनिक अमला पूरी तैयारी और दलबल के साथ गांव पहुंचा। छछरौली के बीडीपीओ कार्तिक चौहान की सीधी निगरानी में जेसीबी मशीनों ने अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की। इस दौरान गांव में किसी भी प्रकार के बवाल या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तड़के ही भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था।
कार्रवाई की कमान संभाल रहे प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा एक्शन अचानक नहीं लिया गया है, बल्कि इसके पीछे माननीय पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त निर्देश हैं। छछरौली थाना प्रभारी वेदपाल के नेतृत्व में पुलिस टीम ने पूरे विवादित क्षेत्र को अपने सुरक्षा घेरे में ले लिया ताकि पैमाइश और तोड़फोड़ के काम में कोई बाधा न आए। अधिकारियों के मुताबिक, कब्जा बहुत बड़े और व्यापक दायरे में किया गया है, जिसके चलते इस पूरी जमीन को कब्जामुक्त कराने में कम से कम तीन से चार दिन का वक्त लग सकता है।
"9 महीने की गर्भवती बहू है, कहां जाएं?" - भावुक हुए ग्रामीण
एक तरफ जहां प्रशासन कानून का हवाला देकर अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस कार्रवाई की जद में आए कई परिवारों ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रोते-बिलखते प्रभावित लोगों का सीधा आरोप है कि प्रशासन स्थानीय राजनीति और रसूखदारों के दबाव में आकर केवल कुछ चुनिंदा घरों को निशाना बना रहा है। मलबे के ढेर के पास खड़ी एक बुजुर्ग महिला ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी बहू नौ महीने की गर्भवती है, ऐसे में इस चिलचिलाती धूप और संकट के समय उनका पूरा परिवार सड़क पर आ गया है। ग्रामीणों ने गुहार लगाई है कि इस मानवीय संकट को देखते हुए कार्रवाई पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए।
पुलिस ने आरोपों को नकारा, कहा- हमारी ड्यूटी सिर्फ शांति रखना
ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे राजनीतिक मिलीभगत के आरोपों पर छछरौली थाना प्रभारी वेदपाल ने स्थिति साफ की है। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग का इस तोड़फोड़ की नीति से कोई सीधा लेना-देना नहीं है। बीडीपीओ कार्यालय की तरफ से लिखित में सुरक्षा और पुलिस बल की मांग की गई थी, जिसके बाद कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के लिए पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया है। थाना प्रभारी ने ग्रामीणों के दावों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि पुलिस केवल अपनी सरकारी ड्यूटी कर रही है और किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा।
फिलहाल, तिहानो गांव में तनावपूर्ण शांति के बीच अवैध निर्माणों को ढहाने का काम लगातार जारी है। जहां एक तरफ प्रशासन हर हाल में पंचायती जमीन का एक-एक इंच वापस लेने के अपने दावे पर अड़ा है, वहीं बेघर हो रहे परिवार इस कड़कड़ाती कार्रवाई के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद क्या नया मोड़ लेता है।