Haridwar Ganga Snan: श्रावण एकादशी पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का महासैलाब, एकादशी पर लाखों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में लगाई आस्था की डुबकी

श्रावण एकादशी पर हरिद्वार में उमड़ा आस्था का महासैलाब, एकादशी पर लाखों श्रद्धालुओं ने मां गंगा में लगाई आस्था की डुबकी
Haridwar Ganga Snan: (पवन शर्मा): श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पावन एकादशी तिथि पर धर्मनगरी हरिद्वार की छटा अद्भुत और अलौकिक नजर आई। मोक्षदायिनी मां गंगा के पावन प्रवाह में आस्था की डुबकी लगाने के लिए तड़के से ही श्रद्धालुओं का रेला घाटों की ओर उमड़ पड़ा। ब्रह्मकुंड और मुख्य स्नान घाट हरकी पैड़ी पर केवल जनसैलाब और भक्ति की अटूट धारा देखने को मिली। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर भगवान श्रीहरि विष्णु और देवाधिदेव महादेव की पूजा-अर्चना की तथा सुख-समृद्धि एवं पुण्य लाभ की कामना की।
सावन और एकादशी का दुर्लभ धार्मिक संयोग
सनातन परंपरा में श्रावण शुक्ल एकादशी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। जहां एक ओर पूरा सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति में लीन रहता है, वहीं एकादशी तिथि पूर्णतः जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित होती है। ऐसे में सावन के महीने में एकादशी का यह पावन संयोग श्रद्धालुओं के लिए दोहरे पुण्य का अवसर लेकर आया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस विशिष्ट तिथि पर व्रत, गंगा स्नान, नाम-जप और दान करने से जीव को कायिक, वाचिक और मानसिक पापों से मुक्ति मिलती है और अक्षय फल की प्राप्ति होती है।
गंगा आरती और शंखनाद से गूंजी नगरी
तड़के जैसे ही सूर्य की पहली किरण गंगा की पावन लहरों पर पड़ी, पूरा माहौल अलौकिक हो उठा। मंदिरों से गूंजती घंटियों की ध्वनियों, शंखनाद और श्रद्धालुओं द्वारा लगाए जा रहे ‘हर-हर गंगे’ व ‘जय श्री हरि’ के उद्घोष ने पूरी नगरी को भक्तिमय बना दिया। कुरुक्षेत्र से हरिद्वार पहुंचे श्रद्धालु संजीव गुप्ता, राजेश धीमान, मनोज शर्मा और उमेश कुमार ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि गंगा की निर्मल और शीतल धारा में स्नान करते ही मन को अद्भुत आत्मिक शांति और नई ऊर्जा की अनुभूति होती है।
घाटों पर दीपदान और दान-पुण्य की रही धूम
गंगा स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से घाटों पर दीप प्रज्ज्वलित कर गंगा मैया की आरती उतारी। इसके साथ ही हरकी पैड़ी और आसपास के इलाकों में अपनी सामर्थ्य के अनुसार श्रद्धालुओं ने साधु-संतों, ब्राह्मणों और निर्धन लोगों को वस्त्र, अन्न और दक्षिणा का दान किया। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि जीवन को मोक्ष देने वाली मां का स्वरूप हैं। हरकी पैड़ी पर उमड़े इस अपार जनसैलाब ने एक बार फिर भारत की सनातन आस्था और गंगा के प्रति जन-जन की अगाध श्रद्धा को रेखांकित किया।
