Haryana Assembly Update: हरियाणा विधानसभा में दूसरा दिन भी हंगामेदार, अनिल विज के ‘सज्जन सिंह’ बयान पर उबला विपक्ष

हरियाणा विधानसभा में दूसरा दिन भी हंगामेदार, अनिल विज के 'सज्जन सिंह' बयान पर उबला विपक्ष
Haryana Assembly Update: हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र का दूसरा दिन पूरी तरह हंगामेदार रहा। कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सदन के बाहर और अंदर माहौल गर्म था। कांग्रेस विधायकों ने सत्र के पहले दिन हुए कथित दुर्व्यवहार (मिसबिहेव) के विरोध में राज्यपाल प्रो. असीम घोष को ज्ञापन सौंपा और हाईकोर्ट चौक से विधानसभा तक रोष मार्च निकाला। इसके बाद जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो प्रश्नकाल से लेकर शून्यकाल तक विपक्षी कांग्रेस और सत्ता पक्ष के मंत्रियों के बीच तीखी झड़पों का सिलसिला जारी रहा।
‘गुंडागर्दी’ शब्द और सुरक्षा रोकने पर फिर उबला विपक्ष
सदन शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सुरक्षाकर्मियों द्वारा विधायकों को रोके जाने का मुद्दा उठाया। हुड्डा ने कहा, “हमारे साथ आज भी वही हुआ, हमें रोका गया। किसके आदेश पर ऐसा हो रहा है? ‘गुंडागर्दी’ शब्द पर अभी तक कोई सफाई नहीं आई है। जुबान फिसल जाती है, मुख्यमंत्री को माफी मांगनी चाहिए।”
इस पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि रिकॉर्डिंग विधायकों को दिखाई जा चुकी है। वहीं शून्यकाल में कांग्रेस विधायक भारत भूषण बत्रा ने असंसदीय शब्दों की किताब का हवाला देते हुए कहा कि ‘गुंडागर्दी’ शब्द पूरी तरह असंसदीय है। पलटवार करते हुए कैबिनेट मंत्री कृष्ण बेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस विधायकों ने ‘स्पीकर बीजेपी दफ्तर में मिलेंगे’ जैसी टिप्पणी कर चेयर को चुनौती दी है, इसलिए माफी उन्हें मांगनी चाहिए।
अनिल विज की ‘सज्जन सिंह’ वाली टिप्पणी पर बवाल
प्रश्नकाल के दौरान बिजली वितरण और उत्पादन को लेकर कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाला के सवाल का जवाब देते हुए ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने जैसे ही कहा, “सज्जन सिंह के अनुयायी सुन लीजिए”, पूरा विपक्ष लामबंद हो गया। सदन में जमकर नारेबाजी शुरू हो गई, जिससे स्थिति को संभालते हुए स्पीकर हरविंद्र कल्याण को चेतावनी देनी पड़ी कि वे विधायकों को ‘नेम’ करने पर मजबूर न करें।
हुड्डा ने तंज कसा कि विज की बात अपनी ही सरकार में कोई नहीं सुनता, इसलिए मुख्यमंत्री जवाब दें। इस पर विज ने तीखा पलटवार करते हुए कहा, “आप पहले शांत रहते थे, अब अचानक आपके अंदर ज्वाला भड़क रही है।” विज ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि राज्य के 7,250 गांवों में से 1,145 गांवों को 24 घंटे बिजली मिल रही है, जबकि राज्य में 2.13 लाख एलयू उत्पादन के मुकाबले दूसरे राज्यों से 5.55 लाख एलयू बिजली खरीदी जा रही है।
खेलों पर घिरे मंत्री विपुल गोयल, सीएम ने किया बचाव
गुहला-चीका से कांग्रेस विधायक देवेंद्र हंस ने 2017 की सीएम घोषणा के बावजूद खेल स्टेडियम का निर्माण पूरा न होने पर सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि उनका क्षेत्र नशे की चपेट में है, इसलिए युवाओं के लिए स्टेडियम जरूरी है।
जवाब में खेल मंत्री विपुल गोयल ने माना कि काम में देरी हुई है और निर्माण कंपनी पर ₹4 लाख का जुर्माना लगाते हुए 31 नवंबर तक काम पूरा करने का दावा किया। हालांकि, जब गोयल ने कहा कि हरियाणा अब जवानों और किसानों के साथ-साथ ‘खिलाड़ियों का प्रदेश’ बन चुका है, तो कांग्रेस विधायकों ने ‘झूठ-झूठ’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। स्थिति बिगड़ती देख सीएम नायब सैनी बचाव में उतरे और कहा कि पिछले 12 सालों में खेलों पर दिए गए ध्यान का ही नतीजा है कि प्रदेश के खिलाड़ी दुनिया में परचम लहरा रहे हैं। सीएम ने नए कांग्रेस विधायकों पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें पुरानी सरकारों के काम का अंदाजा नहीं है।
झज्जर कुआं हादसा: ‘झूठ निकला तो इस्तीफा दूंगा’
बादली से कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स ने कुएं में बछड़े को बचाने उतरे 4 युवकों की मौत का मुद्दा बेहद आक्रामक ढंग से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मौके पर पहुंची एंबुलेंस में कोई जीवन रक्षक उपकरण मौजूद नहीं थे। वत्स ने कहा, “अगर मेरी बात में रत्ती भर भी झूठ निकले तो मैं इस्तीफा देने को तैयार हूं।”
स्वास्थ्य मंत्री आरती राव ने घटना को दर्दनाक बताते हुए कहा कि एंबुलेंस पहुंचने में देरी हुई थी और कुएं में ऑक्सीजन पाइप डालना एंबुलेंस स्टाफ के बस की बात नहीं थी। वहीं मंत्री अरविंद शर्मा ने सफाई दी कि यह एक दुखद हादसा था, जिसमें प्रशासन की कोई लापरवाही नहीं थी।
बहालगढ़ में पेयजल संकट पर तीन साल का आश्वासन
राई से भाजपा विधायक कृष्णा गहलावत ने बहालगढ़ गांव में 75 हजार की आबादी के लिए पेयजल संकट का मुद्दा उठाया। पब्लिक हेल्थ मंत्री रणबीर गंगवा ने बताया कि बहालगढ़ के लिए रेनीवेल का टेंडर हो चुका है और 10 एमएलडी पानी की स्वीकृति दी गई है, जिसे तीन साल में पूरा कर लिया जाएगा। विधायक ने मांग की कि बहालगढ़ के लिए सोनीपत से अलग स्वतंत्र व्यवस्था की जाए, जिस पर मंत्री ने सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया।
