September 3, 2026

Yamunanagar News: अफसरों के रवैये से भड़के किसान, यमुनानगर लघु सचिवालय में ही जमाया डेरा

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Yamunanagar News: अफसरों के रवैये से भड़के किसान, यमुनानगर लघु सचिवालय में ही जमाया डेरा

यमुनानगर लघु सचिवालय में ही जमाया डेरा

Yamunanagar News: यमुनानगर में बुधवार को हरियाणा किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के आह्वान पर किसानों, खेत मजदूरों और दुग्ध उत्पादकों का गुस्सा फूट पड़ा। अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर सैकड़ों की संख्या में किसान लघु सचिवालय पहुंचे और सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। हालांकि, इस दौरान प्रशासनिक रवैये से नाराज किसानों का गुस्सा उस वक्त और भड़क गया जब पहले से तय समय के बावजूद कोई बड़ा अधिकारी ज्ञापन लेने बाहर नहीं आया। इसके विरोध में किसान सचिवालय परिसर में ही जमीन पर बैठकर नारेबाजी करने लगे।

काफी देर तक चले हंगामे और नारेबाजी के बाद आखिरकार प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर पहुंचना पड़ा और किसानों से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन हासिल किया गया।

‘अफसरों का यह रवैया दुखद, समय देकर भी नहीं आए बाहर’

यूनियन के जिलाध्यक्ष जसप्रीत सिंह ने प्रशासनिक उपेक्षा पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि किसान शांतिपूर्ण तरीके से ज्ञापन देने पहुंचे थे। उन्होंने बताया, “प्रशासन को पहले ही सूचित कर दिया गया था, इसके बावजूद लंबे समय तक कोई जिम्मेदार अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा। यह किसानों की समस्याओं के प्रति अधिकारियों की संवेदनहीनता को दर्शाता है। इसी वजह से हमें मजबूरन सचिवालय परिसर में ही दरी बिछाकर धरने पर बैठना पड़ा।”

धरने को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि आज का किसान और पशुपालक दोहरी मार झेल रहा है। एक तरफ खेती की लागत दिन-ब-दिन बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ फसलों का सही दाम नहीं मिल रहा और धान खरीद की प्रक्रिया में जानबूझकर देरी की जा रही है।

दुग्ध उत्पादक और गन्ना किसान भी परेशान

मोर्चा के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार की नीतियों से सिर्फ फसल उगाने वाला किसान ही नहीं, बल्कि गांव का खेत मजदूर और पशुपालक भी आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं। पशुपालकों को दूध के सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे डेयरी उद्योग घाटे का सौदा साबित हो रहा है। इसके अलावा गन्ने का समर्थन मूल्य बढ़ाने और सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी देने की मांग को लेकर भी किसान लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं।

10 सितंबर को पिहोवा में तय होगी आगे की रणनीति

प्रशासन को ज्ञापन सौंपने के बाद किसान नेताओं ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि यह महज एक सांकेतिक विरोध प्रदर्शन था, इसे अंत न समझा जाए। यदि सरकार ने धान खरीद, एमएसपी, गन्ना मूल्य और दूध के वाजिब दाम जैसे संवेदनशील मुद्दों पर जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो आंदोलन को पूरे हरियाणा में फैलाया जाएगा।

मोर्चा ने ऐलान किया है कि 10 सितंबर को कुरुक्षेत्र के पिहोवा में एक बड़ी किसान महापंचायत बुलाई गई है। इस महापंचायत में पूरे प्रदेश भर से किसान जुटेंगे और वहीं से सरकार के खिलाफ एक बड़े और अनिश्चितकालीन आंदोलन की रणनीति का औपचारिक ऐलान किया जाएगा।

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