Nangal Chaudhary : भुंगारका की बेटी कीर्ति यादव ने उत्तराखंड में बढ़ाया हरियाणा का गौरव, 75 किमी माउंटेन ट्रेल रेस में बनीं उप-विजेता
प्रतियोगिता में उप विजेता रही प्रतिभागि कीर्ति यादव मेडल के साथ।
Nangal Chaudhary : (विजय यादव) हौसला मजबूत हो तो बड़े से बड़े पहाड़ भी रास्ते की रुकावट नहीं बन सकते। इस बात को नांगल चौधरी क्षेत्र के गांव भुंगारका निवासी कीर्ति यादव पुत्री अशोक यादव ने सच साबित कर दिखाया है।
कीर्ति ने उत्तराखंड में आयोजित कठिन ‘डैथ मैन माउंटेन ट्रेल’ प्रतियोगिता में 75 किलोमीटर की लंबी दूरी मात्र 13 घंटे 29 मिनट में पूरी कर एक शानदार रिकॉर्ड अपने नाम किया है। इस कठिन चुनौती को सफलतापूर्वक पूरा करने वाली वह हरियाणा की पहली महिला प्रतिभागी बन गई हैं, जिससे पूरे प्रदेश का नाम अल्ट्रा-एंड्योरेंस खेलों में रोशन हुआ है।
हिमालय के दुर्गम रास्तों पर कड़ा इम्तिहान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह साहसिक ट्रेल प्रतियोगिता मालदेवता से धनौल्टी तक हिमालय के दुर्गम और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर गुजरी। इस 75 किलोमीटर के सफर के दौरान प्रतिभागियों को लगभग 2200 मीटर की ऊंचाई का सामना करना पड़ा।
खड़ी चढ़ाई, कठिन उतार-चढ़ाव और लगातार बदलते पहाड़ी मौसम ने एथलीटों की शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता की भी कड़ी परीक्षा ली। कीर्ति ने गजब के धैर्य और निरंतरता का परिचय देते हुए इस सफर को मुकाम तक पहुंचाया।
इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में देश-विदेश के केवल 100 चुनिंदा एलीट एथलीटों को ही कड़े चयन प्रक्रिया के बाद हिस्सा लेने का अवसर मिला था। इसमें भाग लेने के लिए न्यूनतम 10 से अधिक फुल मैराथन पूरी करने का अनुभव होना अनिवार्य था।
ऐसे कड़े मानदंडों को पार कर मैदान में उतरीं कीर्ति ने महिला वर्ग में दूसरा स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। उन्हें इस प्रतियोगिता में कुल 95 अंक (75 डिस्टेंस पॉइंट, 14 ऑब्स्टेकल पॉइंट और 6 बोनस पॉइंट) प्राप्त हुए।
बेटियों के लिए प्रेरणा स्रोत बनीं कीर्ति
ग्रामीणों व गणमान्य लोगों—सरपंच राजेंद्र प्रसाद, दरियाव आर्य, हसराम और दयानंद बाबूजी ने बताया कि कीर्ति इससे पहले पढ़ाई के साथ-साथ एनसीसी की राष्ट्रीय बटालियन का नेतृत्व करने और गणतंत्र दिवस समारोह में प्रथम स्थान हासिल करके भी प्रदेश का गौरव बढ़ा चुकी हैं।
अब 2200 मीटर की ऊंचाई और 75 किलोमीटर लंबी स्पर्धा में उप-विजेता बनकर उन्होंने गांव और क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता से क्षेत्र की अन्य बेटियों को भी खेलकूद और साहसिक खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाने की प्रेरणा मिलेगी।
