September 2, 2026

Aman Arora Press Conference Punjab : पंजाब में ईडी की एंट्री पर सियासी घमासान, अमन अरोड़ा बोले- केंद्र के इशारे पर डराने का खेल चल रहा

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Aman Arora Press Conference Punjab : पंजाब में ईडी की एंट्री पर सियासी घमासान, अमन अरोड़ा बोले- केंद्र के इशारे पर डराने का खेल चल रहा

Aman Arora Press Conference Punjab : पंजाब में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पत्रों और केंद्रीय एजेंसियों की हलचल ने राज्य के सियासी माहौल में गरमाहट ला दी है। आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब के प्रधान और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर सीधे वार किए।

अमन अरोड़ा ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का मुख्य उद्देश्य पंजाब में प्रशासनिक अराजकता फैलाना, ‘आप’ की शीर्ष नेतृत्व को उलझाकर रखना और राज्य के अधिकारियों के भीतर खौफ पैदा करना है। उन्होंने दो टूक कहा कि ईडी केंद्र के ‘तोते’ की भांति काम कर रही है और यदि कानूनी लड़ाई लड़नी ही है तो बराबरी के मैदान पर होगी, जहां एक तरफ ईडी होगी और दूसरी तरफ पंजाब पुलिस।

6 प्रमुख बिंदुओं में समझें कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा के बड़े खुलासे:

पंजाब पुलिस को क्यों नहीं सौंपे जा रहे दस्तावेज?

अमन अरोड़ा ने जानकारी दी कि ईडी ने पंजाब पुलिस को धारा 66(2) के तहत तीसरी चिट्ठी भेजकर प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने को कहा है। हालांकि, जब 28 अगस्त को पंजाब पुलिस ने मामले की गहन जांच हेतु ईडी से जरूरी साक्ष्य और दस्तावेज मांगे, तो कोई जवाब नहीं मिला। यहां तक कि पंजाब पुलिस द्वारा ईडी अधिकारी को 1 सितंबर को पेश होने का समन भेजा गया था, लेकिन कोई भी अधिकारी पुलिस के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ।

मीडिया ट्रायल के जरिए बदनाम करने की साजिश

कौंसिल्स और एजेंसियों के पास कोई ठोस आधार न होने का दावा करते हुए अरोड़ा ने कहा कि केवल मीडिया के जरिए नेताओं की छवि धूमिल करने का खेल चल रहा है। उन्होंने कहा कि कभी मुख्यमंत्री भगवंत मान, कभी संजीव अरोड़ा, तो कभी उनके अपने या लाल चंद कटारूचक के नाम को उछाला जाता है, जबकि हकीकत में एजेंसियों के हाथ पूरी तरह खाली हैं।

अकाली-भाजपा शासनकाल का है एल्टस प्रोजेक्ट मामला

अपने ऊपर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि दो महीने पहले धीर कंस्ट्रक्शन और एल्टस प्रोजेक्ट से उनका नाम जानबूझकर जोड़ा गया। सच्चाई यह है कि एल्टस प्रोजेक्ट का सीएलयू (CLU) साल 2012 में शुरू हुआ था, जब सूबे में अकाली दल और भाजपा की साझा सरकार थी। उसके बाद के वर्षों में भी कई चरण अकाली-भाजपा और कांग्रेस के शासन में पूरे हुए।

मेरे कार्यकाल में हुआ महज एक सीएलयू

अमन अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि करीब 230 एकड़ का लेआउट प्लान साल 2011 में ही मंजूर हो चुका था। उनके मंत्री पद पर रहते हुए केवल एक सीएलयू हुआ, लेकिन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि एल्टस से जुड़ी मूल एफआईआर को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहले ही रद्द (Quash) कर चुका है।

2012 से 2022 तक के जिम्मेदार अफसरों से हो पूछताछ

कैबिनेट मंत्री ने चुनौती देते हुए कहा कि अगर ईडी को सीएलयू प्रक्रिया और लेआउट प्लान में गड़बड़ी दिखती है, तो 2012 से लेकर 2022 तक के सभी जिम्मेदार नीति-निर्माताओं और पूर्व मंत्रियों को जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।

‘हिम्मत है तो सुखबीर और कैप्टन को भी करो गिरफ्तार’

तंज कसते हुए अमन अरोड़ा ने कहा कि यदि सीएलयू की कड़ियों को जोड़ा जाए तो यह महकमा पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखविंदर सिंह सरकारिया से होते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान, उनके खुद के और वर्तमान मंत्री तरुनप्रीत सिंह सोंध (मुंडिया) तक पहुंचता है। अगर जांच करनी ही है तो इन सभी को एक साथ उठाकर पूछताछ कर ली जाए, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

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