PM मोदी ने फिर क्यों कहा- जरूरत न हो तो सोना नहीं खरीदना चाहिए? जानिए रुपये और महंगाई से कनेक्शन

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सोनो ना खरीदने की अपील की
PM Modi gold appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की GDP ग्रोथ रेट 7.8% रहने पर देशवासियों को बधाई दी है। मंगलवार को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर मोदी ने कहा कि वैश्विक संकट के बीच भारत ने 7.8% की विकास दर हासिल की है। उन्होंने इसे देशवासियों की इच्छाशक्ति, मेहनत और सामूहिक ताकत का परिणाम बताया। मोदी ने लोगों से एक बार फिर गैर-जरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा, “अगर जरूरत न हो तो सोना नहीं खरीदना चाहिए।” इससे पहले 11 मई को भी प्रधानमंत्री ने देशवासियों से सोना नहीं खरीदने की अपील की थी।
PM बोले- ‘झूठ की गूंज’ से माहौल खराब करने की कोशिश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के अंदर कुछ लोग निराशा फैलाने और ‘झूठ की गूंज’ के सहारे माहौल खराब करने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों को पार करते हुए भारत ने 7.8% की विकास दर हासिल की है। मोदी ने कहा कि देश को इसी रफ्तार को बनाए रखना होगा और आगे भी तेजी से विकास करना होगा। उनके मुताबिक, भारत की आर्थिक मजबूती को आगे बढ़ाने के लिए देशवासियों की भागीदारी और सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
विदेश यात्रा और विदेश में शादी से बचने की अपील
प्रधानमंत्री ने लोगों से विदेश में घूमने के लिए यात्राएं करने और विदेश में शादी करने से बचने की भी अपील की। उन्होंने लोगों से ‘मेक इन इंडिया’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ने को कहा। मोदी ने कहा कि जितना ज्यादा स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया जाएगा, भारत उतनी ही मजबूती से आगे बढ़ेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि जब भारत आजादी के 100 साल पूरे करेगा, तब देश की युवा पीढ़ी को एक विकसित भारत सौंपा जाएगा।
भारत करीब 99% सोना विदेशों से खरीदता है
भारत अपने इस्तेमाल का करीब 99% सोना विदेशों से खरीदता है। 2025-26 में सोने के आयात का बिल करीब 6.4 लाख करोड़ रुपए रहा। विदेश से सोना खरीदने के लिए भारत को डॉलर में भुगतान करना पड़ता है। ऐसे में सोने का आयात कम होने पर डॉलर की मांग घट सकती है और देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी सुरक्षित रह सकता है। इसका असर विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये पर पड़ता है और डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव कम हो सकता है।
रुपया मजबूत होने पर आयातित चीजें सस्ती हो सकती हैं
रुपया मजबूत रहने का सीधा असर आयात की लागत पर पड़ता है। भारत कच्चे तेल समेत कई जरूरी चीजें विदेशों से खरीदता है और इनके भुगतान के लिए डॉलर का इस्तेमाल करता है। अगर रुपया मजबूत रहता है तो इन वस्तुओं के आयात के लिए अपेक्षाकृत कम रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इससे ईंधन और अन्य आयातित वस्तुओं की लागत कम रखने में मदद मिल सकती है, जिसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है।
कम सोना खरीदा, फिर भी आयात बिल 24% बढ़ा
2025-26 में भारत ने पिछले कारोबारी साल की तुलना में 4.76% कम सोना खरीदा, लेकिन सोने के आयात बिल में करीब 24% की बढ़ोतरी हुई। इसकी बड़ी वजह सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी रही। स्रोत के मुताबिक, अभी सोने की कीमत करीब 1.43 लाख डॉलर प्रति किलो है। यानी भले ही आयात की मात्रा में कमी आई हो, लेकिन ऊंची कीमतों के कारण भारत को सोने के लिए ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ी।
फिजिकल गोल्ड के बजाय ETF का विकल्प
सोने में निवेश करने वालों के लिए फिजिकल गोल्ड के अलावा ETF भी एक विकल्प है। गहने या सिक्कों के मुकाबले ETF में निवेश करने पर सोना रखने के लिए लॉकर की जरूरत नहीं पड़ती और चोरी का जोखिम भी नहीं रहता। प्रधानमंत्री की अपील का आर्थिक संदर्भ यही है कि गैर-जरूरी सोने की खरीद कम होने पर देश का आयात खर्च और डॉलर की मांग घटाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, किसी भी निवेश विकल्प को चुनने से पहले उसके जोखिम, लागत और अपनी जरूरत के हिसाब से फैसला करना चाहिए।
