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प्रॉपर्टी फ्रॉड में फंसे अंबाला के नरेंद्र, 4 लाख का चेक बाउंस होने पर कोर्ट ने ठहराया दो

May 13, 2026 11:55 AM

अंबाला। प्रॉपर्टी के नाम पर ठगी करने और चेक बाउंस के जरिए भुगतान से बचने की कोशिश करने वालों को अंबाला की अदालत ने कड़ा संदेश दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ध्रुव सैनी की अदालत ने बिंजलपुर निवासी नरेंद्र कुमार को दोषी करार देते हुए माना कि उन्होंने न केवल व्यावसायिक नैतिकता का उल्लंघन किया, बल्कि कानूनी देनदारी से बचने के लिए कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश भी की। यह पूरा मामला साल 2014 से शुरू हुआ था, जब एक पड़ोसी ने दूसरे पड़ोसी के भरोसे का फायदा उठाते हुए घर बेचने का जाल बुना था।

2 लाख का बयाना और रजिस्ट्री से लगातार दूरी

शिकायतकर्ता संत राम ने साल 2020 में अदालत की शरण ली थी। उन्होंने बताया कि नवंबर 2014 में नरेंद्र कुमार ने अपना घर बेचने का सौदा 4 लाख रुपये में तय किया था। संत राम ने भरोसे में आकर 2 लाख रुपये बयाने के तौर पर दे दिए। इसके बाद शुरू हुआ तारीखों का अंतहीन सिलसिला। आरोपी नरेंद्र बार-बार रजिस्ट्री कराने से बचता रहा और समय काटता रहा। आखिरकार जब मामला पंचायत और आपसी दबाव तक पहुंचा, तो मार्च 2018 में एक नया समझौता हुआ। इसमें नरेंद्र ने अपनी गलती स्वीकार की और समझौते की शर्तों के मुताबिक बयाने की दोगुनी राशि यानी 4 लाख रुपये लौटाने का वादा किया।

बाउंस चेक और कोर्ट में विरोधाभासी बयानों ने फंसाया

समझौते के एवज में नरेंद्र ने संत राम को 4 लाख रुपये का पोस्ट-डेटेड चेक थमा दिया। पीड़ित को लगा कि शायद अब उसकी रकम वापस मिल जाएगी, लेकिन बैंक में चेक लगाते ही वह 'बाउंस' हो गया। कानूनी नोटिस का जवाब न मिलने पर मामला कोर्ट पहुंचा। सुनवाई के दौरान आरोपी नरेंद्र ने खुद को बचाने के लिए अजीबोगरीब तर्क दिए; पहले दावा किया कि उसके चेक बुक से पन्ने चोरी हो गए थे और हस्ताक्षर फर्जी हैं। हालांकि, जिरह (Cross-examination) के दौरान वह खुद ही अपने जाल में फंस गया और स्वीकार कर लिया कि समझौते और चेक पर हस्ताक्षर उसी के हैं। न्यायाधीश ने इन विरोधाभासों को गंभीरता से लिया और माना कि चेक कानूनी देनदारी चुकाने के लिए ही जारी किया गया था।

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