- by Vinita Kohli
- Nov, 01, 2025 11:34
श्रीहरिकोटा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का महत्वाकांक्षी PSLV-C62 मिशन सोमवार को तकनीकी खराबी के चलते अपने लक्ष्य को पूरी तरह हासिल नहीं कर सका। इस मिशन के तहत अन्वेषा (EOS-N1) नामक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट सहित कुल 15 सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजा गया था, लेकिन मिशन के तीसरे चरण में आई गड़बड़ी के कारण मुख्य सैटेलाइट को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका। ISRO ने सुबह 10:18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV-C62) के माध्यम से इस मिशन को लॉन्च किया था। रॉकेट के शुरुआती चरण सामान्य रूप से सफल रहे, लेकिन तीसरे चरण के दौरान तकनीकी समस्या सामने आई, जिससे सैटेलाइट को आवश्यक वेग नहीं मिल पाया।
मिशन का मुख्य उद्देश्य अन्वेषा (EOS-N1) सैटेलाइट को पृथ्वी से लगभग 600 किलोमीटर ऊँचाई पर स्थित सूर्य-समकालिक कक्षा (Sun-Synchronous Orbit – SSO) में स्थापित करना था। इस कक्षा में सैटेलाइट पृथ्वी के किसी भी स्थान की तस्वीरें एक निश्चित समय पर ले सकता है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली निगरानी और मैपिंग संभव होती है। हालांकि तकनीकी खराबी के कारण यह लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। अन्वेषा सैटेलाइट को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित किया गया है। यह एक अत्याधुनिक खुफिया (स्पाई) सैटेलाइट है, जिसे देश की सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसकी उन्नत इमेजिंग क्षमता इतनी प्रभावशाली है कि यह पृथ्वी से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर रहकर भी झाड़ियों, जंगलों और बंकरों में छिपे लक्ष्यों की स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम है।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, अन्वेषा की तैनाती से भारत की रणनीतिक निगरानी क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होनी थी, विशेष रूप से सीमावर्ती और संवेदनशील क्षेत्रों में। हालांकि इस मिशन में आई असफलता को ISRO ने एक तकनीकी चुनौती के रूप में लिया है। ISRO अधिकारियों का कहना है कि मिशन के दौरान आए तकनीकी दोष का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा, ताकि भविष्य के अभियानों में ऐसी समस्याओं से बचा जा सके। उल्लेखनीय है कि ISRO का सफलता रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा है और एजेंसी इससे पहले भी तकनीकी असफलताओं से सीख लेकर और अधिक सफल मिशन अंजाम दे चुकी है। फिलहाल, देश और वैज्ञानिक समुदाय की नजर ISRO की अगली कार्रवाई और इस मिशन से जुड़े तकनीकी निष्कर्षों पर टिकी हुई है।