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Back to School Routine Tips: समर वेकेशन के बाद स्कूल खुलने पर बच्चे नहीं कर रहे पढ़ाई में फोकस? अपनाएं ये असरदार तरीके

Back to School Routine Tips: समर वेकेशन के बाद स्कूल खुलने पर बच्चे नहीं कर रहे पढ़ाई में फोकस? अपनाएं ये असरदार तरीके

Back to School Routine Tips: समर वेकेशन के बाद स्कूल खुलने पर बच्चे नहीं कर रहे पढ़ाई में फोकस? अपनाएं ये असरदार तरीके

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Back to School Routine Tips: गर्मियों की लंबी और मौज-मस्ती भरी छुट्टियां बच्चों के लिए पूरे साल का सबसे पसंदीदा वक्त होती हैं। देर तक सोकर उठना, दोपहर भर खेलना, नानी-दादी के घर घूमना और टीवी-वीडियो गेम में रमे रहना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बन जाता है। लेकिन जैसे ही जून का महीना खत्म होने को आता है और स्कूलों के कपाट दोबारा खुलते हैं, बच्चों के साथ-साथ माता-पिता की भी मुश्किलें बढ़ने लगती हैं। अचानक से सुबह की हड़बड़ी, भारी-भरकम स्कूल बैग और होमवर्क का दबाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उनके व्यवहार पर साफ दिखने लगता है। कई बच्चे इस अचानक आए बदलाव को स्वीकार नहीं कर पाते और पढ़ाई से जी चुराने लगते हैं।

कड़े अनुशासन की जगह अपनाएं ये व्यावहारिक कदम

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बाल मनोवैज्ञानिकों और शिक्षाविदों का मानना है कि इस नाजुक मोड़ पर बच्चों पर गुस्सा करने या उन पर जबरन पढ़ाई थोपने से स्थिति सुधरने की बजाय और बिगड़ सकती है। बच्चों को वापस उनके पुराने एकेडमिक ट्रैक पर लाने के लिए कुछ बेहद सामान्य लेकिन असरदार कदम उठाए जा सकते हैं, जो बिना किसी तनाव के बच्चों का मन किताबों में लगाने में मददगार साबित होंगे:

क्रमिक बदलाव की नीति: छुट्टियों के ठीक बाद पहले ही दिन से बच्चों से यह उम्मीद न करें कि वे आठ घंटे स्कूल में बिताने के बाद घर आकर तुरंत पढ़ने बैठ जाएंगे। उनके सोने और जागने के समय में रोज 15-20 मिनट का बदलाव करते हुए धीरे-धीरे पुराने समय पर लाएं। शुरुआत में रोजाना महज आधा या एक घंटा पढ़ाई के लिए तय करें और फिर इसे धीरे-धीरे बढ़ाएं।

छोटे और स्पष्ट टार्गेट: बच्चों को एक साथ सारा पेंडिंग काम निपटाने को न कहें। उनके सामने छोटे-छोटे लक्ष्य रखें, जैसे— “आज सिर्फ यह एक चैप्टर पढ़ना है” या “आधे घंटे में यह ड्राइंग पूरी करनी है”। हर छोटे लक्ष्य को पूरा करने के बाद उन्हें बीच-बीच में छोटा ब्रेक भी दें ताकि उनका दिमाग तरोताजा रहे।

रचनात्मकता का सहारा: पढ़ाई को केवल अक्षरों और रटने तक सीमित रखने के बजाय उसमें थोड़ा रोमांच घोलें। बच्चों को समझाने के लिए चार्ट पेपर, रंग-बिरंगे डायग्राम, ज्ञानवर्धक क्विज या कहानियों का सहारा लें। जब सीखने की प्रक्रिया में खेल और मनोरंजन शामिल हो जाता है, तो बच्चा खुद-ब-खुद उसमें दिलचस्पी लेने लगता है।

डिजिटल डिटॉक्स पर फोकस: छुट्टियों के दिनों में अमूमन हर घर में बच्चों का स्क्रीन टाइम (मोबाइल, टैबलेट, टीवी) काफी बढ़ जाता है। स्कूल शुरू होने के बाद गैजेट्स को पूरी तरह छीनने की बजाय उनके इस्तेमाल का समय तय कर दें। स्क्रीन से खाली हुए समय को भरने के लिए उन्हें कॉमिक्स, इनडोर गेम्स या पेंटिंग जैसी क्रिएटिव हॉबीज की तरफ मोड़ें।

संवाद और प्रोत्साहन की ताकत: अगर बच्चा स्कूल जाने में आनाकानी कर रहा है या उसका मन पढ़ाई में नहीं लग रहा, तो उसे डांटने या दूसरों से तुलना करने से बचें। एक दोस्त की तरह उससे बात करें, उसकी परेशानी को समझें और हर छोटी सफलता पर उसकी पीठ थपथपाएं। आपका थोड़ा सा प्रोत्साहन उसके भीतर स्कूल जाने का उत्साह दोबारा जगा सकता है।

धैर्य और समझदारी से सुलझेगी गुत्थी

लंबे ब्रेक के बाद किसी भी इंसान के लिए दोबारा काम पर लौटना आसान नहीं होता, और यही नियम बच्चों पर भी लागू होता है। पैरेंटिंग एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह एक अस्थायी दौर होता है और अमूमन एक से दो हफ्ते के भीतर बच्चे नए माहौल में पूरी तरह ढल जाते हैं। इस बीच सबसे महत्वपूर्ण भूमिका माता-पिता के संयम की होती है। बच्चों को यह अहसास कराना जरूरी है कि स्कूल जाना कोई सजा नहीं, बल्कि दोस्तों से मिलने और कुछ नया सीखने का एक बेहतरीन जरिया है।

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