दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का 89 वर्ष की उम्र में निधन, पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख
Jun 01, 2026 2:32 PM
डेस्क। भारतीय संगीत जगत से एक बेहद दुखद और स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। अपनी मखमली और रूहानी आवाज से साठ और सत्तर के दशक में करोड़ों दिलों पर राज करने वाली दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर अब हमारे बीच नहीं रहीं। 89 वर्ष की आयु में उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली। सुमन जी के निधन की खबर मिलते ही संगीत प्रेमियों और फिल्मी गलियारों में सन्नाटा पसर गया है। सुर साम्राज्ञी के जाने पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। पीएम मोदी का एक ट्वीट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने सुमन कल्याणपुर के गाए गीतों और उनकी विरासत को याद किया है।
पीएम मोदी बोले- संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा अमर रहेंगी सुमन जी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुमन कल्याणपुर को श्रद्धांजलि देते हुए अपने संदेश में लिखा, 'प्रसिद्ध गायिका सुमन कल्याणपुर जी के निधन की खबर सुनकर गहरा दुख हुआ। उनकी मधुर आवाज और भावपूर्ण गायकी ने भारतीय संगीत और हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध करने का काम किया। उन्होंने अपने सदाबहार गीतों के जरिए संगीत प्रेमियों और भारतीय सिनेमा के प्रशंसकों के दिलों में एक अमिट और खास जगह बनाई है। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार, शुभचिंतकों और देश-दुनिया में फैले उनके प्रशंसकों के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। ओम शांति।' प्रधानमंत्री के इस ट्वीट पर आम लोग और संगीत प्रेमी भी लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
छह दशकों का सफर और पद्म भूषण का सम्मान
28 जनवरी 1937 को जन्मी सुमन कल्याणपुर का भारतीय सुगम संगीत में वही स्थान रहा है, जो चुनिंदा शीर्ष गायिकाओं का रहा है। साल 1958 में मुंबई के कारोबारी रामानंद कल्याणपुर से शादी के बंधन में बंधने वाली सुमन जी ने हिंदी समेत कई क्षेत्रीय भाषाओं में सैकड़ों यादगार गीतों को अपनी आवाज दी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी सुर कोकिला के निधन पर शोक जताते हुए कहा कि उनकी जादुई आवाज ने लगभग छह दशकों तक संगीत की दुनिया को रोशन रखा। कला और संगीत के क्षेत्र में उनके इसी अद्वितीय और अप्रतिम योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 2023 में उन्हें प्रतिष्ठित 'पद्म भूषण' सम्मान से अलंकृत किया था।
एक स्वर्णिम युग का अंत
1960 और 1970 का दौर सुमन कल्याणपुर के करियर का स्वर्णिम काल माना जाता है, जब उनके गाए गीत रेडियो से लेकर फिल्मों तक में गूंजते थे। आज भी उनके गाए क्लासिक और रूमानी गाने पुरानी पीढ़ी के साथ-साथ नए युवाओं की जुबां पर भी सजे रहते हैं। संगीत समीक्षकों का मानना है कि सुमन जी के जाने से भारतीय पाशर्व गायन (प्लेबैक सिंगिंग) के एक महान और गौरवशाली अध्याय का अंत हो गया है। उनके निधन से संगीत का वह कोना सूना हो गया है, जिसे उन्होंने अपनी सादगी और सुरों की पवित्रता से सींचा था।