अब पेट्रोल-डीजल नहीं होगा महंगा: रूस से तेल खरीदने की भारत को छूट, अमेरिका ने 3 अप्रैल तक दिया स्पेशल लाइसेंस
Mar 06, 2026 11:49 AM
नई दिल्ली: भारत को रूस से कच्चा तेल खरीदने की अस्थायी छूट मिलने से फिलहाल देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने का खतरा कम हो गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने भारतीय रिफाइनरियों को 30 दिनों का विशेष लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत वे रूस से तेल खरीद सकते हैं। यह लाइसेंस 3 अप्रैल तक वैध रहेगा। अमेरिका का कहना है कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में सप्लाई को स्थिर रखने के लिए उठाया गया है। इससे भारत को पहले से लोड किए गए रूसी कच्चे तेल की खेप लेने की अनुमति मिल गई है और बाजार में आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता कुछ समय के लिए कम हो गई है।
अमेरिका ने अस्थायी लाइसेंस क्यों दिया
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने 6 मार्च को कहा कि यह फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ऊर्जा एजेंडे के तहत लिया गया है। उनके अनुसार भारत अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है और वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति संतुलित रखना जरूरी है।
बेसेंट ने बताया कि ईरान की गतिविधियों से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में भारत जैसे बड़े उपभोक्ता देशों को सीमित समय के लिए राहत देना बाजार को स्थिर रखने का एक तरीका है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि भविष्य में भारत अमेरिकी कच्चे तेल की खरीद भी बढ़ा सकता है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस कदम से वैश्विक बाजार में तेल की कमी नहीं होगी और कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव को रोका जा सकेगा।
5 मार्च तक लोड हुए तेल की ही डिलीवरी
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल ने यह विशेष लाइसेंस जारी किया है। इसके तहत भारत केवल वही रूसी कच्चा तेल खरीद सकेगा जो 5 मार्च तक जहाजों पर लोड हो चुका है।
इसका मतलब है कि जो तेल टैंकर पहले से समुद्र में हैं या रास्ते में हैं, उन्हीं की डिलीवरी भारत को मिल सकेगी। नए कार्गो की लोडिंग इस लाइसेंस के दायरे में नहीं आएगी।
इस व्यवस्था से पहले से तैयार सप्लाई चेन को बाधित होने से बचाया गया है। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि बाजार में अचानक आपूर्ति कम न हो और कीमतों पर दबाव न बने।
एशियाई जल क्षेत्र में मौजूद रूसी तेल टैंकर
रिपोर्टों के मुताबिक भारत उन रूसी तेल कार्गो को खरीदने पर विचार कर रहा है जो इस समय एशियाई जल क्षेत्र या भारतीय समुद्री मार्गों के पास मौजूद हैं। अनुमान है कि करीब 95 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल विभिन्न टैंकरों में लदा हुआ एशिया के आसपास इंतजार कर रहा है।
अगर भारत इन टैंकरों को जल्दी स्वीकार करता है तो सप्लाई जल्दी मिल सकती है। इससे ट्रांसपोर्टेशन का समय घटेगा और लागत भी कम होगी।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता देश है और अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर काफी निर्भर है। देश अपनी कुल जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है।
रूस से तेल आयात में उतार-चढ़ाव
पिछले साल नवंबर में यूक्रेन युद्ध के चलते ट्रम्प प्रशासन ने रूस की प्रमुख तेल कंपनियों लुकोइल और रोजनेफ्ट पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। इन प्रतिबंधों का असर भारत के आयात पर भी पड़ा।
जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात घटकर करीब 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया था। यह नवंबर 2022 के बाद का सबसे कम स्तर था।
हालांकि फरवरी में स्थिति बदली और भारत के कुल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी फिर से बढ़कर लगभग 30 प्रतिशत तक पहुंच गई। भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदता रहा है और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति तय करता है।