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राघव चड्ढा और संदीप पाठक की 'इनसाइड स्टोरी': कैसे 7 दिन में ढह गया आप का राज्यसभा किला

Apr 26, 2026 4:05 PM

नई दिल्ली। राजनीति में कहा जाता है कि दुश्मन से सावधान रहें, लेकिन अपनों पर नजर रखें। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को इस कहावत का कड़वा स्वाद तब चखना पड़ा, जब सात दिनों के भीतर उनकी आंखों के सामने उनकी पूरी राज्यसभा टीम ताश के पत्तों की तरह ढह गई। यह महज इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक ऐसा 'इनसाइड ऑपरेशन' था, जिसकी पटकथा महीनों पहले लंदन से लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक लिखी जा चुकी थी।

केजरीवाल के फोन बजते रहे, वफादार बदलते रहे

बुधवार, 22 अप्रैल की सुबह जब अरविंद केजरीवाल को अपनी पार्टी में किसी बड़ी हलचल की भनक लगी, तो उन्होंने खुद मोर्चा संभाला। एक-एक करके सांसदों को फोन किए गए, लेकिन जवाब में या तो खामोशी मिली या फिर गोल-मोल बातें। सबसे बड़ा धोखा संदीप पाठक की ओर से मिला। पाठक, जिन्होंने पंजाब की जीत की रणनीति बुनी थी, शुक्रवार दोपहर तक केजरीवाल को 'सब ठीक है' का भरोसा देते रहे और शाम होते-होते सीधे बीजेपी मुख्यालय में राघव चड्ढा के साथ मुस्कुराते हुए नजर आए।

इनसाइड स्टोरी

सूत्रों की मानें तो इस विलय की तारीख पहले 27 अप्रैल तय थी, क्योंकि गृह मंत्री अमित शाह बंगाल चुनाव प्रचार में व्यस्त थे। लेकिन जैसे ही बीजेपी को लगा कि केजरीवाल को साजिश की गंध आ गई है और वे डैमेज कंट्रोल में जुट गए हैं, ऑपरेशन की टाइमिंग बदल दी गई। शाह की गैर-मौजूदगी में ही शुक्रवार को इस 'पॉलिटिकल सर्जरी' को अंजाम दे दिया गया।

किरदार और उनकी 'मजबूरी'

इस फूट की कहानी के पात्रों की अपनी-अपनी वजहें थीं। राघव चड्ढा: जिन्हें इस पूरे ऑपरेशन का 'फील्ड कमांडर' कहा जा रहा है। शराब नीति मामले में नाम आने के बाद से ही वे दूरी बनाए हुए थे। लंदन में उनकी आंखों की सर्जरी के दौरान ही बीजेपी से तार जुड़ने की खबरें अब पुख्ता हो रही हैं। उद्योगपति सांसद: अशोक मित्तल (LPU), राजिंदर गुप्ता (ट्राइडेंट) और विक्रमजीत साहनी जैसे नेताओं के लिए राजनीति से ज्यादा व्यापार अहम था। अशोक मित्तल के संस्थानों पर विलय से ठीक 9 दिन पहले हुई ईडी की छापेमारी ने 'मजबूरी' को साफ कर दिया था। हरभजन सिंह: पूर्व क्रिकेटर का झुकाव पहले ही साफ था। उपराष्ट्रपति चुनाव के वक्त से ही वे पार्टी लाइन से अलग नजर आ रहे थे।

राज्यसभा का बदला हुआ भूगोल

इस टूट ने देश की संसदीय व्यवस्था को हमेशा के लिए बदल दिया है। बीजेपी अब राज्यसभा में 113 के आंकड़े पर पहुंच गई है। अब सरकार को 'वन नेशन वन इलेक्शन' या किसी भी विवादित बिल को पास कराने के लिए बीजेडी या वाईएसआरसीपी जैसे क्षेत्रीय दलों की बैसाखियों की जरूरत नहीं पड़ेगी।


शुक्रवार की शाम ढलते-ढलते आम आदमी पार्टी के पास राज्यसभा में केवल संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल ही रह गए। केजरीवाल ने इसे पंजाब के साथ गद्दारी करार दिया है, लेकिन हकीकत यही है कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी ने आप के किले में बड़ी सेंध लगा दी है।

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