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कॉकरोच मरते नहीं हैं: सोशल मीडिया X पर ब्लॉक होने के बाद, नए हैंडल पर चंद घंटों में 1 लाख से ज्यादा भारतीय युवा

May 22, 2026 1:58 PM

दिल्ली। देश की चरमराई व्यवस्था और बेरोजगारी पर तीखे मीम्स और तंज कसकर भारतीय इंटरनेट पर तूफान खड़ा करने वाली 'कॉकरोच जनता पार्टी' को गुरुवार को बड़ा झटका लगा, जब उसका आधिकारिक X अकाउंट अचानक ब्लॉक कर दिया गया। लेकिन भारतीय युवाओं के इस सबसे जिद्दी और नए संगठन ने हार नहीं मानी। ब्लॉक होने के चंद मिनटों के भीतर ही 'कॉकरोच इज बैक' नाम से नया मोर्चा खोल दिया गया। नए अकाउंट के बायो में बड़े अक्षरों में लिखा गया— “कॉकरोच डोंट डाय” (कॉकरोच मरते नहीं हैं)। गुरुवार दोपहर करीब ढाई बजे की गई पहली पोस्ट के बाद देश भर के बेरोजगार और आक्रोशित युवाओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि शुक्रवार सुबह तक इस नए हैंडल पर 1 लाख से ज्यादा लोग जुड़ गए।

इंस्टाग्राम पर बनाया नया नेशनल रिकॉर्ड, हैकिंग की साजिश का आरोप

भले ही X पर इस डिजिटल पार्टी की आवाज को दबाने की कोशिश की गई हो, लेकिन भारतीय इंस्टाग्राम यूजर्स के बीच इसका ग्राफ रॉकेट की रफ्तार से भागा है। शुक्रवार सुबह तक कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टाग्राम हैंडल पर 1.88 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स दर्ज किए गए, जो भाजपा और कांग्रेस जैसी भारत की सबसे बड़ी और स्थापित राजनीतिक पार्टियों के आधिकारिक आंकड़ों से भी कहीं ज्यादा है। इस अप्रत्याशित नेशनल रिकॉर्ड के बीच, बोस्टन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे इसके भारतीय फाउंडर अभिजीत दीपके ने सनसनीखेज दावा किया है कि इस आंदोलन को कुचलने के लिए उनके पर्सनल इंस्टाग्राम अकाउंट को भी हैक करने की नाकाम कोशिश की गई।

देश के बेरोजगारों और आलसियों का वो 'मैनिफेस्टो' जिसने उड़ाई नेताओं की नींद

यह अनोखा डिजिटल संगठन खुद को पारंपरिक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि भारत के उन आम और मध्यमवर्गीय युवाओं की आवाज बताता है जिन्हें मौजूदा सिस्टम ने कभी मुख्यधारा का हिस्सा ही नहीं समझा। अपनी वेबसाइट पर इस पार्टी ने खुद को 'सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक और लेजी (आलसी)' घोषित किया है। पार्टी का हिस्सा बनने के लिए बकायदा चार हरियाणवी व भारतीय मिजाज वाली योग्यताएं तय की गई हैं— आवेदन करने वाला पूरी तरह बेरोजगार हो, बेहद आलसी हो, चौबीस घंटे ऑनलाइन रहता हो और इंटरनेट पर तार्किक रूप से भड़ास (रैंट) निकालने का हुनर रखता हो।

पार्टी के 5 सूत्रीय भारतीय मैनिफेस्टो ने मुख्यधारा की राजनीति में खलबली मचा दी है। CJP का वादा है कि सत्ता में आने पर जजों को रिटायरमेंट के बाद राज्यसभा भेजने या राज्यपाल बनाने जैसी 'पुरस्कार वाली राजनीति' पर पूरी तरह रोक लगेगी। चुनाव में धांधली रोकने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त पर UAPA लगाने, भारतीय महिलाओं को संसद से कैबिनेट तक 50% आरक्षण देने, बड़े कॉर्पोरेट घरानों के मीडिया लाइसेंस रद्द करने और दलबदलू विधायकों-सांसदों पर 20 साल के लिए चुनाव लड़ने और किसी भी पब्लिक ऑफिस पर बैठने की पाबंदी लगाने जैसे क्रांतिकारी वादे इसमें शामिल हैं।

आखिर सुप्रीम कोर्ट की किस टिप्पणी से भड़की थी यह भारतीय चिंगारी?

इस पूरे राष्ट्रव्यापी विवाद की जड़ 15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में हुई एक अहम सुनवाई है। तब चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने रोजगार न मिलने के कारण सोशल मीडिया और आरटीआई (RTI) एक्टिविज्म की राह चुनने वाले भारतीय युवाओं की तुलना कॉकरोच से करते हुए कहा था, 'कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं... जो रोजगार न मिलने पर सोशल मीडिया के जरिए हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।' हालांकि विवाद देशव्यापी होने पर सीजेआई ने सफाई दी कि उनकी टिप्पणी को गलत संदर्भ में पेश किया गया, लेकिन तब तक भारतीय युवाओं का गुस्सा भड़क चुका था और इसके अगले ही दिन इस अनोखी 'कॉकरोच जनता पार्टी' का जन्म हो गया।

अमेरिका से ऑपरेट हो रहा है भारत का यह नया आंदोलन, ट्रेडमार्क के लिए मची होड़

इस डिजिटल आंदोलन को खड़ा करने वाले 30 वर्षीय अभिजीत दीपके मूल रूप से महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले एक भारतीय डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद वे साल 2020 से 2022 तक देश की राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए सोशल मीडिया स्ट्रैटेजी और वायरल मीम्स बनाने का काम करते थे। फिलहाल वे अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से जनसंपर्क में मास्टर्स कर रहे हैं और वहीं से भारतीय समय के अनुसार सोशल मीडिया के जरिए इस पूरे आंदोलन को धार दे रहे हैं।

इस आंदोलन की देशव्यापी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत के ट्रेडमार्क रजिस्ट्री पोर्टल पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम पर अपना मालिकाना हक जताने के लिए तीन अलग-अलग आवेदन भी आ चुके हैं। वहीं जमीनी स्तर पर दिल्ली में युवा कॉकरोच की पोशाक पहनकर देश की सबसे प्रदूषित नदियों में से एक यमुना के किनारे सफाई करते नजर आए, जिससे साफ है कि यह डिजिटल चिंगारी अब भारत की जमीन पर एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले रही है।

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