चंडीगढ़: केंद्र और राज्य सरकार से स्वीकृति तथा धनराशि मिलने के बावजूद प्रदेश में आधा दर्जन से अधिक राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों को फोरलेन बनाने का काम अटका हुआ है। दरअसल, निर्माण में सबसे बड़ी अड़चन वन विभाग की भूमि और उस पर खड़े पेड़ बने हुए हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इन सड़कों को हाईवे श्रेणी में रखते हुए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर ली है और कुछ स्थानों पर काम भी शुरू किया गया, लेकिन वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) न मिलने के कारण कार्य आगे नहीं बढ़ पा रहा है। एनएचएआई ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के माध्यम से नियमानुसार वन विभाग से एनओसी मांगी थी, परंतु अब तक अनुमति न मिलने से फोरलेन निर्माण कार्य रुका हुआ है। 


इसके चलते बढ़ते ट्रैफिक दबाव से आम नागरिकों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, खासकर व्यस्त औद्योगिक और ग्रामीण मार्गों पर रोजाना जाम की स्थिति बन रही है। नूंह से कांग्रेस विधायक आफताब अहमद और बादली से कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स ने हरियाणा विधानसभा के शीतकालीन सत्र में इस मुद्दे को उठाया।  विधायकों ने नूंह से बिलासपुर होते हुए दिल्ली-जयपुर हाईवे से गुरुग्राम-पटौदी मार्ग को जोड़ते हुए रेवाड़ी-रोहतक हाईवे-71 तक प्रस्तावित फोरलेन सड़क का जिक्र करते हुए कहा कि इस मार्ग के फोरलेन न होने से बिलासपुर, पटौदी, हेलीमंडी समेत कई क्षेत्रों में आए दिन ट्रैफिक जाम लग रहा है। इसके अलावा नूंह-अलवर, नूंह-होडल-पलवल, हथीन-नूंह और पुन्हाना-होडल मार्गों के साथ-साथ हिसार और सिरसा के कई प्रमुख मार्गों को भी फोरलेन किया जाना प्रस्तावित है, लेकिन वन विभाग की एनओसी न मिलने से सभी परियोजनाएं अटकी हुई हैं। वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने स्पष्ट किया कि जल्द ही वन विभाग, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर सभी अड़चनों को दूर किया जाएगा।

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