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अगर महिला आरक्षण 2029 में लागू हुआ तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत तथा जीवंत बनेगा: मोदी

Apr 14, 2026 2:17 PM

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि यदि 2029 में लोकसभा और विभिन्न विधानसभाओं के चुनाव महिला आरक्षण के पूर्ण रूप से लागू होने के साथ कराए जाते हैं तो भारतीय लोकतंत्र और अधिक मजबूत तथा जीवंत बनेगा। देश की महिलाओं को लिखे एक पत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह भी कहा कि जब महिलाएं नीति-निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करेंगी तब विकसित भारत की यात्रा और अधिक सशक्त एवं तेज होगी। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए यह अनिवार्य है कि हम अपने विकास की गति को तेज करने के लिए हर संभव प्रयास करें और इसके लिए महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अपरिहार्य है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि इसी सिद्धांत पर 2023 में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पारित हुआ था और इसी सिद्धांत के कारण यह संविधान संशोधन समय की आवश्यकता बन गया है।

उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए विधायी निकायों में उनकी हिस्सेदारी बढ़ना उचित है। उन्होंने कहा कि संसद की तीन दिवसीय बैठक 16 अप्रैल से शुरू हो रही है और इसमें ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधनों को पारित किया जाना चाहिए और इसमें किसी भी प्रकार की और अधिक देरी दुर्भाग्यपूर्ण एवं भारत की महिलाओं के साथ घोर अन्याय जैसा होगा। प्रधानमंत्री ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर साझा किए गए पत्र में कहा, ‘‘यदि 2029 के लोकसभा चुनाव और उस वर्ष होने वाले विभिन्न विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के पूर्ण रूप से लागू होने के साथ कराए जाते हैं, तो हमारा लोकतंत्र और अधिक मजबूत तथा जीवंत बनेगा।’’ मोदी ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि देश की महिलाएं अगले कुछ दिनों में संसद में संविधान संशोधन विधेयक के पारित होने का इंतजार कर रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि देश की बेटियों को उनके इस अधिकार के लिए अनंतकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘‘जब हमारी विधायिकाओं में महिलाओं की आवाज और मजबूत होती है, तो लोकतंत्र की आवाज भी और अधिक सशक्त हो जाती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं संसद की अगली बैठक और संविधान संशोधन के पारित होने के लिए आपका तथा भारत की करोड़ों महिलाओं का आशीर्वाद चाहता हूं। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखें और उनसे इस ऐतिहासिक संसद सत्र में भाग लेने का अनुरोध करें।’’ उन्होंने महिलाओं से कहा कि वे सांसदों को याद दिलाएं कि वे ऐसा काम करने जा रहे हैं जिसका प्रभाव आने वाली सदियों तक महसूस किया जाएगा। उन्होंने कहा, "इससे निश्चित रूप से उनका मनोबल बढ़ेगा!"

सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के नाम से जाना जाता है, पारित किया था। इसे विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया। महिला आरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों के पारित हो जाने से लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। मौजूदा कानून के तहत, महिलाओं के लिए आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता, क्योंकि यह 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने से जुड़ा हुआ था। इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव की आवश्यकता थी, इसलिए सरकार कानून में संशोधन पारित करने के लिए बजट सत्र में तीन दिन की बैठक अलग से बुला रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद की फिर बैठक होगी जिसमें 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' से संबंधित एक महत्वपूर्ण संविधान संशोधन पर चर्चा होगी और उम्मीद है कि वह पारित भी होगा। उन्होंने कहा,‘‘ मैं देख रहा हूं कि इसे लेकर हर तरफ जोश और उत्साह का माहौल है। देशभर की माताएं और बहनें इस बात पर खुशी जाहिर कर रही हैं कि उन्हें विकसित भारत के निर्माण में, देश की नीतियों के निर्धारण में और अधिक मजबूती से अपना योगदान देने का अवसर मिलने वाला है।’’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी नारी शक्ति देश के विकास में अपनी अमिट छाप छोड़ रही है और यह सक्रिय योगदान हमारे समय के सबसे सुखद घटनाक्रम में से एक है।’’ उन्होंने कहा,‘‘ स्टार्टअप्स की दुनिया में देखें....कई में महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं वे हर क्षेत्र में बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रही हैं। 21वीं सदी में दुनिया विज्ञान और नवोन्मेष के दम पर आगे बढ़ रही है। इन क्षेत्रों में भी महिलाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।’’

मोदी ने कहा कि शिक्षण, कला, साहित्य, संगीत, सिनेमा, नृत्य आदि क्षेत्र में भी उनकी उपलब्धियां बहुत प्रेरक हैं। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान में भी इस बड़े बदलाव को साफ देखा जा सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारतीय महिला खिलाड़ी अधिक मेडल जीत रही हैं और नए-नए रिकॉर्ड बना रही हैं। साथ ही वे समाज की पुरानी सोच को भी बदल रही हैं। उनकी ये सफलताएं अनगिनत बेटियों को खेलों में अपना करियर बनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।’’ मोदी ने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए यह आवश्यक है कि हम विधायी निकायों में भी उनकी हिस्सेदारी बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि यह ऐसा विषय है जिस पर पिछले कई दशकों से व्यापक सहमति बनी हुई है, जब सरदार पटेल अहमदाबाद नगरपालिका के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की पहल की थी।

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले तीन-चार दशकों में विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए गए, लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं रहे। कुछ अवसर तो ऐसे आए जब हम लक्ष्य पाने के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन फिर भी हमें सफलता नहीं मिल सकी।’’ मोदी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस विषय पर सदैव सर्वसम्मति रही, वह आज तक अपने तार्किक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाया है। उन्होंने कहा , ‘‘हम 2047 में अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेंगे। देश, विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आधी आबादी, यानि देश की नारी शक्ति की आकांक्षाओं के साथ पूरा न्याय हो।’’

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