Search

Noida Workers Protest: वेतन बढ़ोतरी के बावजूद दूसरे दिन भी हिंसा, पुलिस ने संभाला मोर्चा, मामले में 300 से अधिक गिरफ्तार

Apr 14, 2026 3:40 PM

नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में मंगलवार को भी फैक्ट्री कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी रहा, जहां वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे श्रमिकों की पुलिस से झड़प हो गई। भीड़ ने कई जगह पुलिस वाहनों पर पथराव किया, जिसके बाद पुलिस ने हालात को नियंत्रित करते हुए प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया। पूरे गौतमबुद्ध नगर के औद्योगिक क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और सुबह 5 बजे से फ्लैग मार्च जारी है।

भारी सुरक्षा बल और निगरानी

स्थिति को देखते हुए PAC और RAF की 15 कंपनियां तैनात की गई हैं, साथ ही 26 पुलिस अधिकारियों को भी नोएडा भेजा गया है। इनमें 8 एडिशनल एसपी और 18 डीएसपी शामिल हैं। पुलिस प्रशासन ने CCTV कैमरों और ड्रोन के जरिए लगातार निगरानी बढ़ा दी है, ताकि किसी भी तरह की हिंसा को तुरंत रोका जा सके। औद्योगिक इलाकों में पुलिस की मौजूदगी लगातार बनी हुई है।

प्रशासन की सख्ती और कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के DGP राजीव कृष्ण लखनऊ कंट्रोल रूम से स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि उपद्रवियों से सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान की भरपाई कराई जाएगी। वहीं पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि अब तक 300 से अधिक गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं और अफवाह फैलाने वाले कई सोशल मीडिया ग्रुप्स की पहचान की गई है।

सरकार का वेतन बढ़ाने का फैसला

प्रदेश सरकार ने देर रात फैक्ट्री कर्मचारियों की मांग को स्वीकार करते हुए न्यूनतम मजदूरी में 3000 रुपए तक की बढ़ोतरी की है। यह नई दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी। इसके साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया है कि श्रमिकों का वेतन हर महीने की 10 तारीख से पहले सीधे बैंक खातों में पहुंचे। ओवरटाइम और छुट्टी के दिन काम करने पर दोगुना भुगतान करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।

राहुल गांधी की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नोएडा में जो हुआ, वह श्रमिकों की आखिरी चीख है, जिसे अनसुना किया गया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से लेने की बात कही।

पहले दिन हुआ था बड़ा नुकसान

सोमवार को हुए प्रदर्शन में हालात और ज्यादा बिगड़ गए थे, जब करीब 42 हजार कर्मचारी सड़कों पर उतर आए थे। 350 से ज्यादा फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ हुई और 50 से अधिक गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। इसके अलावा 150 से ज्यादा वाहनों को नुकसान पहुंचा और पुलिस पर भी पथराव किया गया था।

हाई पावर्ड कमेटी की रिपोर्ट

हाई पावर्ड कमेटी के सदस्य आलोक कुमार ने कहा कि कुछ बाहरी तत्वों ने श्रमिकों की आड़ में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में उद्योगों के लिए सकारात्मक माहौल को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया है। सरकार ने साफ किया है कि हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

You may also like:

Please Login to comment in the post!