फरीदाबाद में मातम: रिजल्ट के तनाव में 10वीं की छात्रा और 12वीं के छात्र ने की खुदकुशी
Apr 19, 2026 12:10 PM
फरीदाबाद। फरीदाबाद के पल्ला थाना क्षेत्र में परीक्षा परिणामों के तनाव ने दो मासूम जिंदगियों को निगल लिया है। अंकों की इस अंधी दौड़ में शामिल एक 10वीं की छात्रा और एक 12वीं के छात्र ने मौत को गले लगा लिया। पहली हृदयविदारक घटना हरकेश नगर कॉलोनी की है, जहां अपने माता-पिता की इकलौती लाडली ने सिर्फ इसलिए ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी क्योंकि उसके अंक उम्मीद से महज 8 प्रतिशत कम रह गए थे। छात्रा को भरोसा था कि वह 80 फीसदी का आंकड़ा पार करेगी, लेकिन 72 प्रतिशत अंक आते ही वह मानसिक रूप से टूट गई।
मां से मोमोज के पैसे मांगे और फिर कभी वापस नहीं लौटी लाडली
रिजल्ट वाले दिन शाम करीब पौने छह बजे छात्रा ने अपनी मां से बड़े प्यार से मोमोज खाने के लिए पैसे मांगे। मां को जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी बेटी के मन में क्या चल रहा है। पैसे लेकर घर से निकली छात्रा जब रात तक नहीं लौटी, तो परिजनों के हाथ-पांव फूल गए। अगले दिन पुलिस को उसका शव मेवला महाराजपुर के पास रेलवे ट्रैक पर मिला। जीआरपी को जांच के दौरान एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने भगवान कृष्ण को संबोधित करते हुए अपनी निराशा और दुख का वर्णन किया है। मृतका के पिता एक निजी कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर हैं, जो अब अपनी इकलौती संतान को खोने के गम में डूबे हैं।
सूने घर में 12वीं के छात्र ने दी जान; छोटी बहन ने देखा खौफनाक मंजर
खुदकुशी का दूसरा मामला पल्ला की गली नंबर-3 का है। यहां रहने वाले 12वीं के एक छात्र ने उस वक्त फंदा लगा लिया जब घर पर कोई नहीं था। छात्र के पिता उत्तराखंड गए हुए थे और मां अपनी ड्यूटी पर थी। दोपहर करीब डेढ़ बजे जब उसकी छोटी बहन स्कूल से वापस लौटी, तो घर का दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी आवाज देने के बाद भी जब भाई ने दरवाजा नहीं खोला, तो पड़ोसियों की मदद से कुंडी तोड़ी गई। अंदर का नजारा देख सबकी रूह कांप गई; छात्र का शव चुन्नी के सहारे फंदे से लटका हुआ था।
अंकों की रेस या जिंदगी की जंग? पुलिस ने जताई चिंता
पल्ला थाना पुलिस और जीआरपी दोनों मामलों की बारीकी से तफ्तीश कर रही है। पुलिस ने शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। इस दोहरी त्रासदी ने एक बार फिर समाज और शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अधिकारियों ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर अंकों को लेकर मानसिक दबाव न बनाएं और उनके व्यवहार में आने वाले बदलावों पर नजर रखें।