हरियाणा निकाय चुनाव: कांग्रेस ने रेवाड़ी-धारूहेड़ा में उम्मीदवार घोषित कर बढ़त बनाई
Apr 21, 2026 11:56 AM
हरियाणा के रेवाड़ी और धारूहेड़ा में शहरी निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर राजनीतिक बढ़त ले ली है। रेवाड़ी नगर परिषद और धारूहेड़ा नगर पालिका में चेयरमैन पद के लिए नाम घोषित होने के बाद स्थानीय स्तर पर चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। खास बात यह है कि सत्तारूढ़ भाजपा अभी तक इन सीटों पर अपने प्रत्याशी तय नहीं कर पाई है, जिससे मुकाबले की दिशा को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
रेवाड़ी में निहारिका चौधरी पर दांव
रेवाड़ी नगर परिषद चेयरमैन पद के लिए कांग्रेस ने निहारिका चौधरी को मैदान में उतारा है। वह शहरी जिला प्रधान प्रवीण चौधरी की पत्नी हैं और उनका परिवार लंबे समय से कांग्रेस से जुड़ा रहा है।
उनकी सास हीरो देवी दो बार पार्षद रह चुकी हैं, जबकि ससुर चौधरी हंसराज जाटव समाज के प्रधान हैं। ऐसे में परिवार की राजनीतिक पकड़ और संगठन में सक्रियता को देखते हुए पार्टी ने यह फैसला लिया है।
धारूहेड़ा में कुमारी राज को टिकट
धारूहेड़ा नगर पालिका में कांग्रेस ने कुमारी राज को उम्मीदवार बनाया है। उनका परिवार पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव के करीबी माना जाता है और उसी समर्थन के चलते उन्हें टिकट मिला है।
कुमारी राज के ससुर अभय सिंह पहले सरपंच और जिला पार्षद रह चुके हैं, जिससे स्थानीय राजनीति में उनकी पकड़ मजबूत मानी जा रही है।
10 मई को वोटिंग, पूरा शेड्यूल जारी
राज्य में पंचकूला, अंबाला, सोनीपत नगर निगम के साथ रेवाड़ी नगर परिषद और धारूहेड़ा, सांपला व उकलाना नगर पालिका में 10 मई को मतदान होगा। यदि कहीं पुनर्मतदान की जरूरत पड़ी तो 12 मई को वोटिंग कराई जाएगी।
नामांकन प्रक्रिया 21 से 25 अप्रैल तक चलेगी, 27 अप्रैल को जांच होगी और 28 अप्रैल को नाम वापसी के बाद चुनाव चिन्ह जारी किए जाएंगे।
उपचुनाव भी साथ में, NOTA पर नया नियम
इसी दिन पानीपत और करनाल जिला परिषद के वार्ड, ब्लॉक समिति, सरपंच और पंच पदों के उपचुनाव भी होंगे और उसी दिन नतीजे घोषित कर दिए जाएंगे।
इस बार मतदान EVM से होगा लेकिन वीवीपैट का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। खास बात यह है कि NOTA का विकल्प रहेगा, लेकिन इससे चुनाव परिणाम पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा
इन चुनावों के जरिए शहरों में विकास, सफाई, पानी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर नई दिशा तय होगी। स्थानीय निकायों के फैसले सीधे तौर पर नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े होते हैं, इसलिए इन चुनावों का असर हर घर तक महसूस होगा।