Faridkot Farmers Protest: शंभू-खनौरी के बाद फरीदकोट में बढ़ा तनाव, 21 किसानों ने दी गिरफ्तारी

Faridkot Farmers Protest : फरीदकोट में मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हुए किसान
- सरकार के खिलाफ सिद्धूपुर गुट का विरोध तेज
Faridkot Farmers Protest : पंजाब सरकार की नीतियों और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को दबाने के कथित रवैये के खिलाफ भारतीय किसान यूनियन (एकता सिद्धूपुर) का ‘जेल भरो आंदोलन’ लगातार मजबूत होता दिख रहा है। इसी कड़ी में आंदोलन के तीसरे चरण के तहत सोमवार को 21 किसानों के एक और जत्थे ने फरीदकोट मोर्चा स्थल से करीब 350 मीटर की दूरी पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी गिरफ्तारी दी।
किसान संगठन का आरोप है कि राज्य सरकार किसानों की जायज मांगों को सुनने के बजाय उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है। नेताओं का कहना है कि प्रशासन और पुलिस का यह रुख किसान आंदोलन को कमजोर करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, लेकिन किसान अपने हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटने वाले।
क्यों बदला गया आंदोलन का तरीका ?
किसान नेताओं ने खुलासा किया कि 29 अगस्त को जब किसान लैंड मॉर्गेज बैंक के सामने शांतिपूर्ण धरने में शामिल होने जा रहे थे, तब उन्हें रास्ते में रोक दिया गया। संगठन का मानना है कि सरकार खनौरी और शंभू मोर्चों की तरह फरीदकोट मोर्चे को भी बलपूर्वक कुचलना चाहती है। इस प्रशासनिक रवैये के विरोध में यूनियन ने एक आपातकालीन राज्य स्तरीय बैठक बुलाई।
बैठक में यह तय किया गया कि आम जनता को सड़कों पर जाम की वजह से होने वाली दिक्कतों से बचाया जाए। इसीलिए रणनीति बदलते हुए ‘जेल भरो अभियान’ की शुरुआत की गई, ताकि आम लोगों को परेशानी भी न हो और सरकार तक किसानों का विरोध भी प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
क्या हैं किसानों की प्रमुख मांगें?
आंदोलनकारी किसानों ने सरकार के सामने अपनी मांगों को बेहद स्पष्ट रूप से रखा है। यूनियन की सबसे पहली मांग यह है कि लैंड मॉर्गेज बैंक द्वारा किसानों से जबरन या सुरक्षा के नाम पर लिए गए खाली चेक तुरंत वापस किए जाएं।
इसके अलावा, कर्ज में डूबे किसानों को राहत देने के लिए एक व्यावहारिक ‘वन टाइम सेटलमेंट’ (OTS) योजना लागू की जाए। संगठन ने यह मांग भी जोर-शोर से उठाई है कि शंभू और खनौरी मोर्चों के दौरान जिन किसानों की ट्रॉलियों, ट्रैक्टरों और अन्य सामानों का नुकसान या चोरी हुई है, सरकार उनका पूरा मुआवजा जल्द से जल्द चुकता करे।
मांगें पूरी न होने पर संघर्ष तेज करने का ऐलान
एसकेएम (नॉन-पॉलिटिकल) इंडिया के राष्ट्रीय संयोजक और बीकेयू एकता सिद्धूपुर के प्रदेश अध्यक्ष सरदार जगजीत सिंह दल्लेवाल तथा फरीदकोट के जिलाध्यक्ष बोहर सिंह रुपैयावाला की ओर से जारी बयान में सरकार को सीधी चेतावनी दी गई है।
किसान नेतृत्व ने स्पष्ट कहा है कि यदि सरकार ने इन मांगों का समय रहते कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले दिनों में इस संघर्ष को राज्यभर में और व्यापक रूप दिया जाएगा।
इस मौके पर जिला कोषाध्यक्ष गुरादित्ता सिंह बाजाखाना, जैतो ब्लॉक अध्यक्ष शिंदरपाल सिंह, बलजिंदर सिंह वाड़ा भाईका, नायब सिंह शेर सिंह वाला, लवप्रीत सिंह चकसाहू, निर्मल सिंह ढिलवां, सुखचरण सिंह काला, तेजा सिंह पक्का, सुरजीत सिंह सेवेवाला, जतिंदरजीत सिंह भिंडर, होशियार सिंह सोना मिश्री वाला और नायब सिंह ढिलवां समेत कई वरिष्ठ किसान नेता मौजूद रहे।
