गुरुग्राम कोर्ट का फैसला: फर्जी पुलिस बनकर वसूली करने वालों की जेल अवधि ही बनी सजा, रिहाई के आदेश
Mar 27, 2026 11:19 AM
गुरुग्राम। गुरुग्राम की जिला अदालत ने एक दिलचस्प मामले में फैसला सुनाते हुए दो ऐसे जालसाजों को दोषी ठहराया है, जिन्होंने खाकी का खौफ दिखाकर एक मासूम युवक को अपनी ठगी का शिकार बनाया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुनील चौहान की अदालत ने राजस्थान निवासी मोहित और मध्य प्रदेश के देवकी नंदन को इस मामले में गुनहगार माना है। हालांकि, अदालत ने नरमी बरतते हुए यह आदेश दिया कि आरोपियों द्वारा अब तक जेल में बिताया गया समय ही उनकी सजा के लिए पर्याप्त है, जिसके बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
डेटिंग ऐप से बिछाया जाल, फिर 'क्राइम ब्रांच' बनकर किया अपहरण
यह पूरा मामला जून 2023 का है, जब पीड़ित पवन कुमार साहू को एक डेटिंग ऐप के जरिए झांसे में लिया गया था। आरोपी मोहित टांक ने उसे गुरुग्राम के सेक्टर-39 स्थित साइबर पार्क में मिलने के लिए बुलाया। जैसे ही पवन वहां पहुंचा, आरोपियों ने उसे जबरन एक गाड़ी में बैठा लिया। खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए आरोपियों ने पवन पर 'साइबर अपराध' में शामिल होने का झूठा आरोप मढ़ा और उसे डराने के लिए गाड़ी को सेक्टर-39 स्थित अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) के दफ्तर की ओर ले गए। रास्ते में एक और व्यक्ति गाड़ी में सवार हुआ, जिसे इन ठगों ने अपना 'उच्च अधिकारी' बताया।
1 लाख की डिमांड और 50 हजार में 'सेटलमेंट'
हैरानी की बात यह है कि आरोपियों ने पीड़ित को केस में न फंसाने के बदले एक लाख रुपये की भारी-भरकम मांग रखी। डरे-सहमे पीड़ित ने काफी मिन्नतें कीं, जिसके बाद सौदा 50 हजार रुपये में तय हुआ। पवन ने आनन-फानन में अपने भाई से संपर्क किया और उसके खाते से 50 हजार रुपये आरोपियों के बताए अकाउंट में ट्रांसफर करवाए। पैसे मिलते ही आरोपियों ने उसे छोड़ दिया, जिसके बाद पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर सदर थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
कानूनी पेच और अदालत का रुख
पुलिस ने तफ्तीश के बाद मोहित और देवकी नंदन को दबोच लिया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तमाम सबूत पेश किए जिससे यह साबित हुआ कि दोनों ने फर्जी पहचान बताकर उगाही की थी। अदालत ने माना कि आरोपियों ने कानून को हाथ में लिया और पुलिस की छवि खराब की, लेकिन मामले की परिस्थितियों और आरोपियों द्वारा अब तक जेल में काटे गए समय को देखते हुए कोर्ट ने इसे ही अंतिम सजा मान लिया। इस फैसले ने एक बार फिर साइबर सिटी में डेटिंग ऐप्स और फर्जी पुलिसकर्मियों के बढ़ते खतरे की ओर इशारा किया है।