Search

हरियाणा रोडवेज कर्मी को बड़ा झटका: बार-बार गैरहाजिर रहने पर हाई कोर्ट ने बर्खास्तगी को ठहराया सही

Mar 29, 2026 5:31 PM

हरियाणा। चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के लिए अनुशासन और कर्तव्यपरायणता का एक कड़ा संदेश जारी किया है। हरियाणा रोडवेज के एक हेल्पर की बर्खास्तगी के मामले में सुनवाई करते हुए जस्टिस सुदीप्ति शर्मा की पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि कोई कर्मचारी बार-बार और बिना किसी ठोस कारण के ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है, तो उसे सेवा में बने रहने का कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा दायर नियमित द्वितीय अपील को स्वीकार करते हुए हिसार की अपीलीय अदालत के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसने कर्मचारी की बहाली का रास्ता साफ किया था।

अनुकंपा पर मिली थी नौकरी, पर व्यवहार में रही 'लापरवाही'

मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, कर्मचारी हरनूप सिंह को उनके पिता के निधन के बाद हरियाणा रोडवेज में अनुकंपा के आधार पर हेल्पर के पद पर नियुक्त किया गया था। वर्ष 1997 में उनका तबादला करनाल डिपो में हुआ, लेकिन रिकॉर्ड से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि हरनूप सिंह लंबे समय तक बिना किसी पूर्व अनुमति के अपनी ड्यूटी से नदारद रहे। विभाग ने उन्हें सुधारने के कई मौके दिए; कई बार चार्जशीट जारी की गई, विभागीय जांच बैठाई गई और 'लीव विदाउट पे' (बिना वेतन अवकाश) जैसी दंडात्मक कार्रवाइयां भी की गईं, लेकिन उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया।

विभाग ने अपनाई पूरी कानूनी प्रक्रिया, कर्मचारी साबित हुआ 'विफल'

हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि हरियाणा रोडवेज प्रशासन ने बर्खास्तगी से पहले सभी तय नियमों का पालन किया था। जांच अधिकारी नियुक्त किए गए और हरनूप सिंह को अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई का पर्याप्त अवसर दिया गया। हालांकि, कर्मचारी न तो अपनी लंबी अनुपस्थिति का कोई ठोस कारण बता सका और न ही कोई प्रामाणिक चिकित्सा प्रमाण पत्र पेश कर पाया। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनने के बावजूद कर्मचारी ने न तो विभाग के गवाहों से जिरह की और न ही अपने बचाव में कोई सबूत पेश किया।

हाई कोर्ट का कड़ा रुख: अनुशासनहीनता के लिए सरकारी तंत्र में जगह नहीं

जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत (हिसार अपीलीय कोर्ट) ने इस मामले में कानून की गलत व्याख्या की थी। हाई कोर्ट ने जोर देकर कहा कि अनुकंपा के आधार पर मिली नौकरी का मतलब यह कतई नहीं है कि कर्मचारी नियमों को ताक पर रख दे। विभागीय जांच विधिसम्मत तरीके से की गई थी, इसलिए कोर्ट हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं देखता। इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि सरकारी सेवाओं में 'अनुशासनहीनता' के लिए कोई जगह नहीं है और बार-बार गैरहाजिर रहना सेवा समाप्ति का एक वैध आधार है।

You may also like:

Please Login to comment in the post!