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दिल्ली मेट्रो अलर्ट: महिला कोच में घुसे तो लगेगा 5,000 का जुर्माना, 1 अप्रैल से बदल सकते हैं नियम

Mar 29, 2026 5:00 PM

दिल्ली। देश की राजधानी की लाइफलाइन कही जाने वाली दिल्ली मेट्रो में सफर अब केवल टोकन या कार्ड लेने तक सीमित नहीं रह गया है। यदि आप मेट्रो के फर्श पर बैठने, फर्श पर थूकने या महिला आरक्षित कोच में घुसने जैसी आदतों से मजबूर हैं, तो संभल जाइए। केंद्र सरकार ने 'मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002' में आमूलचूल बदलाव की तैयारी कर ली है। 'जन विश्वास (विधियों में संशोधन) विधेयक, 2026' के माध्यम से लाए जा रहे इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य मेट्रो परिसर में कड़ा अनुशासन लागू करना और कानूनी प्रक्रियाओं को सरल बनाना है।

महिला कोच में घुसपैठ पड़ेगी महंगी: 20 गुना बढ़ा जुर्माना

मेट्रो में अक्सर देखा जाता है कि पुरुष यात्री अनजाने में या जानबूझकर महिलाओं के लिए आरक्षित कोच में सवार हो जाते हैं। अब तक इसके लिए महज 250 रुपये का मामूली जुर्माना था, जिसे लोग गंभीरता से नहीं लेते थे। लेकिन नए प्रस्ताव के अनुसार, अब इस 'भूल' की कीमत सीधे 5,000 रुपये वसूली जाएगी। यह कदम मेट्रो में महिला यात्रियों की सुरक्षा और उनके निजी स्थान को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।

फर्श पर बैठना और थूकना भी 'लग्जरी' अपराध

अक्सर लंबी दूरी के सफर में यात्री मेट्रो के फर्श पर बैठ जाते हैं, जिससे अन्य यात्रियों को आने-जाने में असुविधा होती है। अब तक फर्श पर बैठने, थूकने, झगड़ा करने या शराब पीकर यात्रा करने जैसे मामलों में अधिकतम 500 रुपये तक का जुर्माना होता था। नए नियमों के तहत इसे बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया गया है। यानी अब छोटी सी लापरवाही भी आपके पूरे महीने का बजट बिगाड़ सकती है।

पोस्टर चिपकाने और गंदगी फैलाने पर 10 हजार की चोट

मेट्रो की संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने या डिब्बों के भीतर विज्ञापन और पोस्टर चिपकाने वालों के लिए भी कड़े प्रावधान किए गए हैं। वर्तमान में धारा 62(3) के तहत इसके लिए जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान है। लेकिन अब सरकार ने इसे पूरी तरह 'मौद्रिक दंड' में बदलने का प्रस्ताव दिया है। अब जेल की जगह सीधे 10,000 रुपये का जुर्माना वसूला जाएगा। जानकारों का मानना है कि जेल भेजने की लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचने और त्वरित दंड सुनिश्चित करने के लिए यह बदलाव गेम-चेंजर साबित होगा।

क्यों पड़ी इन बदलावों की जरूरत?

DMRC और केंद्र सरकार का मानना है कि दिल्ली मेट्रो में यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में पुराने नियमों और कम जुर्माने के कारण लोग अक्सर अनुशासन तोड़ते थे। नए प्रस्तावों के जरिए सरकार मेट्रो को विश्वस्तरीय मानकों के अनुरूप साफ-सुथरा और अनुशासित बनाना चाहती है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे सफर के दौरान उद्घोषणाओं और साइनबोर्ड्स का ध्यान रखें, क्योंकि अब एक छोटी सी चूक आपकी जेब पर 'सर्जिकल स्ट्राइक' जैसी हो सकती है।

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