Haryana Caste Certificate: हरियाणा में जाति प्रमाण पत्र की शब्दावली बदलेगी, मुख्यमंत्री सैनी ने बावल समरसता सम्मेलन में दिए निर्देश

हरियाणा में जाति प्रमाण पत्र की शब्दावली बदलेगी, मुख्यमंत्री सैनी ने बावल समरसता सम्मेलन में दिए निर्देश
Haryana Caste Certificate: हरियाणा के अहीरवाल अंचल के बावल (रेवाड़ी) में आयोजित एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम के मंच से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बड़ा सामाजिक संदेश दिया है।
मेघवाल उत्थान समिति की ओर से आयोजित ‘समरसता एवं प्रतिभा सम्मान समारोह’ में शिरकत करते हुए सीएम सैनी ने घोषणा की कि भविष्य में जाति प्रमाण पत्रों में ‘चमार’ शब्द के स्थान पर ‘मेघवाल’ शब्द दर्ज करने के लिए हरियाणा सरकार केंद्र सरकार को अपनी आधिकारिक सिफारिश भेजेगी। चूंकि जाति की शब्दावली से जुड़े विषय केंद्र के क्षेत्राधिकार में आते हैं, इसलिए राज्य स्तर पर सहमति के बाद यह प्रस्ताव दिल्ली भेजा जाएगा।
मेघवाल उत्थान समिति की सभी मांगों पर मुहर, ₹31 लाख का अनुदान
बावल की अनाज मंडी में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मेघवाल उत्थान समिति की ओर से मुख्यमंत्री के सामने 10 प्रमुख मांगें रखी गई थीं। इनमें जाति प्रमाण पत्र का नाम बदलने के अलावा रेवाड़ी और बावल में धर्मशालाओं के निर्माण और हर पंचायत में लाइब्रेरी स्थापित करने जैसी बातें शामिल थीं।
सीएम सैनी ने समाज की इन सभी मांगों को जायज ठहराते हुए संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए और समिति के सामाजिक कार्यों को बढ़ावा देने के लिए 31 लाख रुपये का अनुदान देने की भी घोषणा की।
मंच से नीचे उतरकर 411 प्रतिभाओं को दिया सम्मान
समारोह की सबसे खास बात मुख्यमंत्री का सहज अंदाज रहा। शिक्षा, खेल, स्वास्थ्य और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रदेश का नाम रोशन करने वाली 411 युवा प्रतिभाओं को सम्मानित करने के दौरान सीएम सैनी खुद मंच से नीचे आए और युवाओं के बीच जाकर फोटो खिंचवाई।
इस दौरान उनके साथ हरियाणा के कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह, बावल विधायक डॉ. कृष्ण कुमार, रेवाड़ी विधायक लक्ष्मण सिंह यादव और कोसली विधायक अनिल यादव भी मौजूद रहे। दूसरी ओर, कार्यक्रम के मद्देनजर सुरक्षा कारणों से पुलिस ने कुछ स्थानीय कांग्रेस व छात्र नेताओं को एहतियातन हिरासत में भी लिया।
महापुरुषों के विचारों से ही बनेगा समरस समाज
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि समरसता कोई एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि जीने की एक शैली है। उन्होंने संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज की ‘बेगमपुरा’ की अवधारणा को याद दिलाते हुए कहा कि महापुरुषों ने ऐसे समाज का सपना देखा था, जहां किसी के साथ भेदभाव, अन्याय या भय का भाव न हो। सीएम ने महात्मा ज्योतिबा फुले, डॉ. भीमराव आंबेडकर और माता सावित्रीबाई फुले के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि ज्ञान, स्वाभिमान और समान अवसर ही समाज के हर वर्ग को आगे ले जाने का एकमात्र रास्ता है।
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