Haryana Milk Price Hike: हरियाणा में 100 रुपये लीटर बिकेगा दूध? हिसार-जींद के बाद अब सिरसा में बुलाई गई महापंचायत

हरियाणा में 100 रुपये लीटर बिकेगा दूध? हिसार-जींद के बाद अब सिरसा में बुलाई गई महापंचायत
Haryana Milk Price Hike: हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों का सब्र अब जवाब देने लगा है। प्रदेश के कई जिलों में दूध की दरें बढ़ाने की उठी मांग की लपटें अब सिरसा जिले तक पहुंच गई हैं। सिरसा के कालांवाली में आज बुधवार को पशुपालकों और ग्रामीणों की एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें दूध और देसी घी के नए रेट तय किए जाएंगे। दो दिन पहले भी ग्रामीणों ने इस मुद्दे पर चर्चा की थी, लेकिन सर्वसम्मति न बनने के कारण अंतिम फैसला आज के लिए टाल दिया गया था।
चारे-बिनौले के आसमान छूते भाव, पशु बेचने को मजबूर हुए किसान
पशुपालक सत्ता चहल, सतपाल सिंह किंगरा और सिकंदर का कहना है कि बीते 5-6 सालों से दूध के दामों में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि पशुओं की खुराक के दाम आसमान छू रहे हैं। बाजार में खल, चूरी, बिनौला और सूखे-हरे चारे की कीमतें इतनी बढ़ चुकी हैं कि पशुओं का पेट भरना भी जेब पर भारी पड़ रहा है। कई पशुपालकों की स्थिति तो यह हो गई है कि वे खर्चा न निकाल पाने के कारण अपने मवेशी बेचने को मजबूर हो गए हैं। इसी आर्थिक तंगी से उबरने के लिए आज गांव के सरपंचों और ब्लॉक समिति सदस्यों को फैसले में शामिल किया गया है।
100 रुपये लीटर भैंस का दूध और 2000 रुपये किलो देसी घी बेचने की तैयारी
फिलहाल बाजार में भैंस का दूध 70 से 80 रुपये और गाय का दूध 50 से 60 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। लेकिन संगठित हो रहे पशुपालक अब भैंस का दूध सीधे 100 रुपये प्रति लीटर, गाय का दूध 80 रुपये प्रति लीटर और शुद्ध देसी घी के दाम 1500 से 2000 रुपये प्रति किलो तय करने की जिद पर अड़े हैं। हिसार के राजथल गांव से शुरू हुई यह मुहिम अब हांसी, कुरुक्षेत्र, कैथल और जींद के गांवों में फैलते हुए पूरे प्रदेश की डेयरी अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रही है।
वीटा प्लांटों को भी सौंपा गया ज्ञापन, ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से बिगड़ा बजट
गांवों में पंचायतों के फैसलों के अलावा संगठित डेयरी उद्योग पर भी इसका असर दिख रहा है। डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन (DFA) ने वीटा (Vita) के विभिन्न प्रोसेसिंग प्लांटों में ज्ञापन सौंपकर प्रति लीटर 2 से 3 रुपये की बढ़ोतरी की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि डीजल-पेट्रोल के दामों में वृद्धि के कारण दूध के कलेक्शन और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च काफी बढ़ गया है। अगर सरकार और एजेंसियां जल्द ही खरीद दरों में इजाफा नहीं करती हैं, तो आम उपभोक्ता की जेब पर दूध का नया बोझ पड़ना तय है।
