Haryana News: हरियाणा में मिलावटी पनीर पर बड़ा एक्शन, एनालॉग और नकली पनीर की बिक्री पर लगा 1 साल का बैन

हरियाणा में मिलावटी पनीर पर बड़ा एक्शन, एनालॉग और नकली पनीर की बिक्री पर लगा 1 साल का बैन
Haryana News: हरियाणा की मंडियों, दुकानों और रेस्तरां में पनीर के नाम पर बेचे जा रहे ‘सफेद जहर’ के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक का सबसे सख्त कदम उठाया है। सरकार ने दूध की वसा (मिल्क फैट) के बजाय वनस्पति तेल या गैर-डेयरी वसा से तैयार होने वाले ‘एनालॉग पनीर’ के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर एक साल के लिए पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. मनोज कुमार ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं, जिसे हरियाणा सरकार के आधिकारिक राजपत्र (गजट) में भी प्रकाशित कर दिया गया है।
यह साफ किया गया है कि जो डेयरी संचालक और व्यापारी निर्धारित मानकों के अनुसार शुद्ध दूध से असली पनीर बना रहे हैं, उनके कारोबार पर इस आदेश का कोई असर नहीं पड़ेगा।
70 फीसदी सैंपल फेल, सरकारी जांच में खुला मिलावट का बड़ा खेल
की ओर से यह कठोर निर्णय यूं ही नहीं लिया गया, बल्कि इसके पीछे जांच रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच पूरे प्रदेश से पनीर और उसके विकल्पों के 285 नमूने इकट्ठे किए थे। जब सरकारी और अधिसूचित लैब में इनकी जांच हुई, तो इनमें से करीब 70 प्रतिशत यानी 200 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे।
जांच में 171 सैंपल सब-स्टैंडर्ड (निम्नस्तरीय) और 29 सैंपल सीधे तौर पर सेहत के लिए असुरक्षित पाए गए। प्रयोगशाला की रिपोर्ट से साफ हुआ कि असली दुग्ध वसा को निकालकर उसमें पाम ऑयल, वसा और अन्य बाहरी केमिकल मिलाए जा रहे थे।
सप्लाई चेन पर पूरी तरह शिकंजा, किसी भी नाम से बेचने पर मनाही
इस नए आदेश की सबसे खास बात यह है कि मिलावटखोर अब नाम बदलकर भी इस नकली उत्पाद को नहीं बेच पाएंगे। प्रतिबंध सिर्फ तैयार उत्पाद पर ही नहीं, बल्कि इसकी पूरी सप्लाई चेन पर लागू होगा। यानी निर्माता, प्रसंस्करणकर्ता, थोक व्यापारी, ट्रांसपोर्टर और फुटकर विक्रेता—हर किसी को इसके दायरे में लाया गया है।
बिना उचित बिल, बैच नंबर, कंपनी के नाम और आवश्यक लेबल के खुलेआम बेचे जा रहे इस मिलावटी पनीर के मुख्य स्रोत का पता लगाना बेहद मुश्किल हो रहा था। इसी वजह से सरकार को इसके निर्माण और वितरण की हर कड़ी को पूरी तरह ब्लॉक करने का फैसला लेना पड़ा।
होटल, रेस्तरां और क्लाउड किचन भी आए जद में, ग्राहकों को झांसा देना पड़ेगा भारी
अक्सर देखा जाता है कि लोग होटल या रेस्तरां में जाकर पनीर की डिश ऑर्डर करते हैं, लेकिन उन्हें असली पनीर की जगह सस्ता एनालॉग पनीर परोस दिया जाता है। सरकार ने इस चालाकी को रोकने के लिए होटल, रेस्तरां, ढाबों, कैटरर्स और क्लाउड किचन पर भी सख्त पाबंदी लगा दी है।
ये प्रतिष्ठान अब किसी भी व्यंजन में गैर-डेयरी या एनालॉग पनीर का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। मेन्यू कार्ड या बिल में जानकारी छिपाकर ग्राहकों को धोखे में रखने वाले ढाबा व रेस्तरां मालिकों पर अब सीधी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बाजार में जारी रहेगी असली पनीर की बिक्री, घबराने की जरूरत नहीं
सरकार के इस आदेश के बाद आम उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। डेयरी या दुकानों पर शुद्ध दूध से बना असली और मानकों के अनुरूप पनीर पहले की तरह ही मिलता रहेगा। एफएसएसएआई (FSSAI) के नियमानुसार, सामान्य पनीर में कम से कम 50 प्रतिशत दुग्ध वसा (शुष्क आधार पर) और अधिकतम 60 प्रतिशत नमी होनी चाहिए।
मध्यम और कम वसा (लो-फैट) वाले असली पनीर को निर्धारित घोषणा के साथ सीलबंद पैकेट में बेचने की छूट बनी रहेगी। इसके अलावा फ्रोजन डेजर्ट, प्रोसेस्ड चीज और मिक्स्ड फैट स्प्रेड जैसे अन्य अधिसूचित मानकीकृत उत्पाद इस बैन से बाहर रखे गए हैं।
नियम तोड़ने पर जब्त कर नष्ट किया जाएगा माल, जेल की सजा का प्रावधान
एक साल का यह प्रतिबंध केवल कागजी चेतावनी नहीं है, बल्कि इसके पीछे कड़े कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून की धारा 24, 50, 51, 52, 53, 55 और 59 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
दोषी पाए जाने पर न सिर्फ भारी जुर्माना और जेल की सजा हो सकती है, बल्कि मौके पर पकड़े गए मिलावटी सामान को तुरंत जब्त कर नष्ट करने के अधिकार भी अधिकारियों को दिए गए हैं। त्यौहारों के सीजन से पहले सरकार के इस सख्त रुख से मिलावटखोरों में हड़कंप मच गया है।
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