Haryana Roadways Strike: हरियाणा रोडवेज की 5-6 सितंबर को प्रस्तावित हड़ताल स्थगित, सरकार ने वार्ता के लिए बुलाया

हरियाणा रोडवेज की 5-6 सितंबर को प्रस्तावित हड़ताल स्थगित, सरकार ने वार्ता के लिए बुलाया
Haryana Roadways Strike: हरियाणा में आगामी 5 और 6 सितंबर को होने वाली रोडवेज बसों की चक्का जाम हड़ताल फिलहाल टल गई है, जिससे राज्य के लाखों दैनिक यात्रियों ने राहत की सांस ली है। कर्मचारी यूनियनों की हड़ताल की कड़ी चेतावनी के बाद हरकत में आई सरकार ने यूनियन के शीर्ष पदाधिकारियों को मांगों पर बातचीत के लिए चंडीगढ़ बुला लिया है। सरकार के इस सकारात्मक रुख को देखते हुए रोडवेज यूनियनों ने आपातकालीन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए बैठक की और दो दिवसीय हड़ताल को स्थगित करने का फैसला लिया।
वार्ता विफल हुई तो 21-22 सितंबर को थमेंगे चक्के
सिरसा डिपो के प्रधान पृथ्वी सिंह ने इस फैसले की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि रोडवेज कर्मचारी सरकार के साथ टकराव के बजाय बातचीत से समाधान चाहते हैं। उन्होंने कहा, “सरकार की ओर से हमारे प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आधिकारिक बुलावा आया है। हम वार्ता की मेज पर अपनी मांगें रखेंगे। लेकिन अगर सरकार ने हमारी जायज मांगों पर सहमति नहीं जताई या केवल खोखले आश्वासन दिए, तो 21 और 22 सितंबर को पूरे प्रदेश में चक्का जाम किया जाएगा।”
इससे पहले 5 और 6 सितंबर की हड़ताल की घोषणा के बाद हरियाणा रोडवेज प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया था और यात्रियों की संभावित दुश्वारियों को देखते हुए वैकल्पिक बसों का इंतजाम किया जा रहा था।
सिरसा बस स्टैंड पर दिखा था कर्मचारियों का आक्रोश
हड़ताल की इस घोषणा से पहले बुधवार को सिरसा बस स्टैंड पर कर्मचारियों के गुस्से का नजारा देखने को मिला था। विभिन्न रोडवेज यूनियनों के बैनर तले कर्मचारियों ने बस डिपो पर दो घंटे तक सांकेतिक धरना दिया। परिवहन मंत्री और सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। इसके बाद कर्मचारियों ने बस स्टैंड परिसर में पैदल मार्च निकालकर अपनी ताकत दिखाई और महाप्रबंधक (GM) को मुख्यमंत्री के नाम मांगों का ज्ञापन सौंपा था।
गौरतलब है कि सबसे पहले चौपटा बस स्टैंड पर हुई यूनियन नेताओं की अहम बैठक में ही सितंबर के पहले सप्ताह में चक्का जाम करने पर सर्वसम्मति से मुहर लगी थी।
पे-ग्रेड, प्रमोशन और पक्की भर्ती समेत ये हैं मुख्य मांगें
रोडवेज कर्मचारी लंबे समय से अपनी कई लंबित मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। यूनियनों की प्रमुख मांगों में चालकों और परिचालकों (ड्राइवर-कंडक्टर) के पे-ग्रेड में बढ़ोतरी करना, परिचालकों को तीन अतिरिक्त वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) देना और जोखिम भरा काम करने वाले कर्मचारियों को जोखिम भत्ता लागू करना शामिल है। इसके अलावा 10 सालों से अटका पड़ा बकाया बोनस, अर्जित अवकाश (Earned Leave) की पुरानी व्यवस्था की बहाली और विभाग में खाली पड़े पदों पर पक्की भर्तियां करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है।
कर्मचारी यूनियनों ने यह भी मांग रखी है कि बेड़े में शामिल की जा रही नई इलेक्ट्रिक बसों को निजी हाथों में सौंपने के बजाय सीधे परिवहन विभाग के तहत ही संचालित किया जाए। साथ ही वर्कशॉप में कर्मचारियों की कमी दूर करने और लंबित पड़े प्रमोशनों को जल्द निपटाने की मांग पर भी पेंच फंसा हुआ है। अब देखना होगा कि आने वाली बैठक में सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
