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हरियाणा में खुले में कूड़ा फेंकना पड़ेगा महंगा, 5 हजार जुर्माना और बार-बार गलती पर संपत्ति सील

Mar 09, 2026 12:01 PM

हरियाणा। हरियाणा में सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू होने जा रही है। चंडीगढ़ में राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि अब सड़कों, नालियों, पार्कों और जल स्रोतों के आसपास कचरा फैलाने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) ने बताया कि पहली बार पकड़े जाने पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगेगा, जबकि दोबारा नियम तोड़ने पर यह राशि 10 हजार रुपये तक पहुंच सकती है।

राज्य सरकार ने यह कदम नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के निर्देशों के बाद उठाया है। अधिकारियों का कहना है कि खुले में कचरा फेंकने से न सिर्फ शहरों की साफ-सफाई प्रभावित होती है, बल्कि नालियां जाम होने और जल स्रोतों के प्रदूषण की समस्या भी बढ़ती है।

सड़कों और नालियों में कचरा फेंकने पर सख्त रोक

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि सालिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016 के तहत सड़कों, नालियों, जल स्रोतों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद अगर कोई व्यक्ति ऐसा करते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर तुरंत जुर्माना लगाया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार लगातार नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। जरूरत पड़ने पर उनकी संपत्ति को सील करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

बड़े संस्थानों पर भी सख्त नियम लागू

सरकार ने बड़े स्तर पर कचरा पैदा करने वाले संस्थानों के लिए भी कड़े नियम लागू किए हैं। जिन संस्थानों या प्रतिष्ठानों से रोजाना 50 किलोग्राम या उससे अधिक कचरा निकलता है, उन्हें बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में रखा गया है।

ऐसे संस्थानों द्वारा नियमों का उल्लंघन करने पर पहली बार 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। दोबारा गलती मिलने पर यह जुर्माना बढ़कर 50 हजार रुपये तक हो सकता है।

कचरे का अलग-अलग वर्गों में करना होगा पृथक्करण

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार अब हर कचरा उत्पादक के लिए कचरे का पृथक्करण अनिवार्य होगा। लोगों को जैविक, अजैविक और घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग रखना होगा ताकि उसका सही तरीके से निपटान किया जा सके।

सरकार का मानना है कि अगर कचरे का सही तरीके से पृथक्करण और निपटान होगा तो शहरों में गंदगी और प्रदूषण की समस्या कम होगी। इससे नालियों के जाम होने और जल स्रोतों के दूषित होने की घटनाएं भी कम हो सकती हैं।

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