हरियाणा में अब घर बैठे नहीं मिलेगी एलटीसी: यात्रा की 'पर्ची' दिखाओ और पैसा पाओ, 2028 से बदल जाएगा नियम
Mar 14, 2026 12:26 PM
हरियाणा। हरियाणा सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए छुट्टियों में सैर-सपाटे से जुड़ी एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर है। सरकार ने एलटीसी (LTC) के वर्तमान स्वरूप को पूरी तरह बदलने का मन बना लिया है। अब तक प्रदेश में लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स बिना कहीं सफर किए भी हर चार साल में एक महीने की बेसिक सैलरी या पेंशन का लाभ उठा लेते थे, लेकिन नए आदेशों ने इस 'शॉर्टकट' पर ब्रेक लगा दिया है। मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से जारी ताजा निर्देशों के मुताबिक, अब एलटीसी का पैसा तभी मिलेगा जब कर्मचारी वास्तव में पर्यटन पर निकलेगा।
बिना यात्रा लाभ लेने वालों पर सरकार की नजर
सरकार का मानना है कि एलटीसी का मूल उद्देश्य कर्मचारियों को काम के बोझ से राहत देना और उन्हें परिवार के साथ देश भ्रमण के लिए प्रोत्साहित करना था। हालांकि, हकीकत में अधिकतर कर्मचारी यात्रा पर जाने के बजाय घर बैठे ही एक महीने का वेतन लेना पसंद करते थे। अब सरकार ने पुरानी व्यवस्था को किनारे करते हुए 1984 के मूल नियमों को कड़ाई से लागू करने का फैसला किया है। 1 जनवरी 2028 से लागू होने वाले इन नियमों के तहत केवल सार्वजनिक परिवहन (सरकारी बस या ट्रेन) से की गई यात्रा का ही रीइंबर्समेंट किया जाएगा। यदि आप अपनी निजी कार से घूमने जाते हैं, तो सरकार उसकी फूटी कौड़ी भी नहीं देगी।
हसला ने खोला मोर्चा, बताया कर्मचारी हितों पर चोट
सरकार के इस फैसले ने कर्मचारी संगठनों के बीच हलचल पैदा कर दी है। हरियाणा स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन (हसला) ने इस बदलाव का पुरजोर विरोध किया है। हसला के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंधु का कहना है कि एलटीसी के बदले मिलने वाली एक महीने की सैलरी उन कर्मचारियों के लिए बड़ा सहारा थी, जो पारिवारिक मजबूरियों या स्वास्थ्य कारणों से लंबी यात्राएं नहीं कर सकते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती कर रही है, जिससे लाखों शिक्षकों और पेंशनभोगियों में भारी रोष है। संगठन ने मांग की है कि एक महीने के वेतन वाला विकल्प पहले की तरह ही बहाल रखा जाए।
पेंशनर्स और संविदा कर्मियों पर भी पड़ेगा असर
नए नियमों की जद में केवल नियमित कर्मचारी ही नहीं, बल्कि आईएएस अधिकारी, न्यायिक अधिकारी, संविदा कर्मचारी और पेंशनर्स भी आएंगे। अब तक इन सभी श्रेणियों को हर चार साल के ब्लॉक ईयर में होम टाउन या भारत भ्रमण के नाम पर एक महीने की राशि दी जाती थी। लेकिन 1 जनवरी 2028 से किसी भी संवैधानिक या वैधानिक निकाय के गैर-सरकारी सदस्यों को भी यह लाभ नहीं मिलेगा। विभाग ने साफ कर दिया है कि अब फाइलों में 'यात्रा' करने का दौर खत्म हो गया है, अब कर्मचारियों को अपनी छुट्टियों का आनंद वास्तव में पर्यटन स्थलों पर जाकर ही लेना होगा।
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