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हरियाणा ग्रुप-डी भर्ती में बड़ा उलटफेर: अब 100% CET स्कोर पर मिलेगी नौकरी, नया नियम लागू

May 14, 2026 5:14 PM

हरियाणा। हरियाणा में सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं के लिए राहत और चुनौती, दोनों ही साथ आई हैं। प्रदेश सरकार ने ग्रुप-डी (चतुर्थ श्रेणी) की भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह बदलते हुए अब 'सिर्फ मेरिट' का रास्ता अख्तियार कर लिया है। मानव संसाधन विभाग द्वारा जारी ताजा गजट अधिसूचना के मुताबिक, अब उन सभी पदों पर (जिनकी योग्यता 10वीं पास है) भर्ती के लिए केवल कॉमन एलिजिबिलिटी टेस्ट (CET) के अंकों को ही आधार माना जाएगा। सरकार का यह कदम चयन प्रक्रिया से मानवीय दखल और कथित पक्षपात को खत्म कर इसे पूरी तरह पारदर्शी बनाने की कवायद माना जा रहा है।

दो हिस्सों में बंटा सिलेबस: हरियाणा के ज्ञान को मिली तवज्जो

नई अधिसूचना ने परीक्षा के पैटर्न को भी स्पष्ट कर दिया है। सिलेबस को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है। कुल अंकों का 75 प्रतिशत हिस्सा सामान्य जागरूकता, रीजनिंग, गणित, अंग्रेजी और हिंदी जैसे विषयों के नाम रहेगा। वहीं, शेष 25 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह हरियाणा के इतिहास, भूगोल, संस्कृति और समसामयिक घटनाओं (Current Affairs) के लिए आरक्षित किया गया है। गौर करने वाली बात यह है कि ग्रुप-डी के लिए प्रश्नपत्र का स्तर 10वीं (मैट्रिक) के समकक्ष रखा जाएगा, ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के छात्र समान धरातल पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

पुराने अभ्यर्थियों के लिए 'ब्रिज' फॉर्मूला: 2027 तक मिली संजीवनी

सरकार ने उन अभ्यर्थियों का भी खास ख्याल रखा है जो पहले ही CET पास कर चुके हैं। अधिसूचना में साफ किया गया है कि जिन छात्रों ने 12 जनवरी 2024 को ग्रुप-डी की परीक्षा पास की थी, उनकी पात्रता 11 जनवरी 2027 तक बरकरार रहेगी। इन पुराने अभ्यर्थियों के अंकों को नई व्यवस्था के अनुसार 'नॉर्मलाइज' (सामान्यीकृत) किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि पुराने और भविष्य के नए अभ्यर्थियों को एक ही तराजू में तौलकर एक संयुक्त मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, जिससे किसी भी पक्ष को नुकसान न हो।

तत्काल प्रभाव से लागू हुए नए नियम

हरियाणा ग्रुप-डी कर्मचारी अधिनियम 2018 में किए गए ये संशोधन गजट प्रकाशन की तिथि से ही प्रभावी हो गए हैं। इस नए बदलाव के बाद अब चयन प्रक्रिया में केवल उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता और CET का प्रदर्शन ही उसकी किस्मत का फैसला करेगा। भर्ती एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे भविष्य की सभी ग्रुप-डी नियुक्तियों में इसी 100% वेटेज वाले फॉर्मूले को अपनाएं। सरकार का मानना है कि इस नीति से कानूनी अड़चनें कम होंगी और भर्ती प्रक्रिया में तेजी आएगी।

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