पशुपालकों की मौज: हरियाणा में 11 मई से घर-घर जाकर लगेगा पशुओं को मुफ्त टीका, जानें पूरा शेड्यूल
May 10, 2026 11:01 AM
हरियाणा। हरियाणा की डेयरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुधन को अब बीमारियों से बचाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। प्रदेश के कृषि एवं पशुपालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने घोषणा की है कि आगामी 11 मई से राज्य में गलघोंटू (HS) और मुंहखुर (FMD) जैसी घातक बीमारियों के खिलाफ एक बड़ा मोर्चा खोला जाएगा। एक महीने तक चलने वाले इस 'टीकाकरण महाअभियान' का सीधा मकसद पशुओं की जान बचाना और किसानों को होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान को रोकना है। अक्सर इन बीमारियों की चपेट में आने से पशु न केवल दूध देना कम कर देते हैं, बल्कि कई बार उनकी मृत्यु तक हो जाती है।
तकनीक में नंबर वन: अब दो बीमारियों के लिए लगेगा सिर्फ एक टीका
हरियाणा ने पशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पशुपालन विभाग के प्रधान सचिव विजय दहिया के मुताबिक, हरियाणा भारत का इकलौता ऐसा राज्य बन गया है जो इन दोनों बीमारियों (मुंहखुर और गलघोंटू) के लिए एक ही संयुक्त (Combined) टीके का इस्तेमाल कर रहा है। पहले पशुओं को इन दोनों रोगों के लिए अलग-अलग समय पर टीके लगवाने पड़ते थे, जिससे उन्हें बार-बार दर्द सहना पड़ता था। अब इस नई व्यवस्था से पशुओं को तकलीफ कम होगी और विभाग के लिए भी अभियान का प्रबंधन आसान हो जाएगा। इस अभियान के तहत 4 महीने से ऊपर की सभी गायों और भैंसों को कवर किया जाएगा।
घर-घर दस्तक देगी विभाग की टीमें, पूरी सेवा होगी मुफ्त
पशुपालकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विशेष रणनीति तैयार की है। अब किसानों को अपने पशुओं को लेकर सरकारी अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि विभाग की मोबाइल टीमें खुद पशुपालकों के दरवाजे पर दस्तक देंगी। सबसे अहम बात यह है कि यह पूरी सेवा पूरी तरह मुफ्त है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि टीकाकरण का सारा खर्च प्रदेश सरकार वहन करेगी ताकि छोटे और सीमांत किसानों पर किसी भी तरह का बोझ न पड़े।
कोल्ड चेन का पुख्ता इंतजाम: खराब नहीं होगी वैक्सीन
टीकाकरण की गुणवत्ता और असर को बनाए रखने के लिए विभाग ने आधुनिक इंतजाम किए हैं। महानिदेशक डॉ. प्रेम सिंह ने बताया कि वैक्सीन को सुरक्षित रखने के लिए आइस लाइन्ड रेफ्रिजरेटर (ILFAs) और कोल्ड चेन का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया गया है। उन्होंने पशुपालकों से अपील की है कि जब भी टीमें गांव में आएं, तो वे अपने पशुओं का टीकाकरण जरूर करवाएं। गौरतलब है कि मुंहखुर रोग में पशुओं के मुंह और पैरों में छाले पड़ जाते हैं, जिससे वे चारा छोड़ देते हैं और उनकी कार्यक्षमता खत्म हो जाती है। समय पर टीका लगने से न केवल पशु सुरक्षित रहेंगे, बल्कि राज्य के दुग्ध उत्पादन में भी स्थिरता बनी रहेगी।