हरियाणा में गैस किल्लत की खबरों पर सीएम सैनी का बड़ा एक्शन: कालाबाजारी की तो रद्द होगा लाइसेंस
Mar 12, 2026 12:17 PM
हरियाणा। हरियाणा में पिछले कुछ दिनों से रसोई गैस (LPG) और ईंधन की किल्लत को लेकर मची अफरा-तफरी के बीच मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रदेश में कोई भी गैस एजेंसी या वितरक सिलिंडरों की कालाबाजारी या जमाखोरी करता पाया गया, तो उसका लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया जाएगा। बुधवार को अपने आवास पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के उच्च अधिकारियों के साथ हुई आपात बैठक में सीएम ने साफ किया कि जनता को घबराने की जरूरत नहीं है, सरकार निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
स्टॉक का गणित: कहीं 7 दिन तो कहीं महज साढ़े तीन दिन का बैकअप
भले ही सरकार आपूर्ति सामान्य होने का दावा कर रही हो, लेकिन आंकड़ों की परतें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। प्रदेश में सक्रिय प्रमुख तेल कंपनियों के पास उपलब्ध स्टॉक की स्थिति मिली-जुली है:
इंडियन ऑयल (IOC): कंपनी के पास फिलहाल सबसे कम, यानी लगभग साढ़े तीन दिन का स्टॉक बचा है। आईओसी की रोजाना की खपत 1,310 मीट्रिक टन है, जबकि स्टॉक में 2,966 मीट्रिक टन ही मौजूद है।
भारत पेट्रोलियम (BPC): यहाँ स्थिति काफी बेहतर है। कंपनी के पास करीब 7.1 दिन का भंडार है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPC): एचपीसी के पास लगभग 5.8 दिन की जरूरत पूरी करने लायक गैस उपलब्ध है। हालांकि, अधिकारियों का तर्क है कि ट्रांजिट (रास्ते में) मौजूद गैस की खेप पहुंचते ही यह बैकअप फिर से बढ़ जाएगा।
कमर्शियल सिलिंडरों पर संकट, अस्पतालों को प्राथमिकता
बैठक में यह बात भी निकलकर सामने आई कि घरेलू गैस के मुकाबले कमर्शियल (वाणिज्यिक) सिलिंडरों की आपूर्ति फिलहाल बाधित हो रही है। इस कमी को देखते हुए सरकार ने 'प्रायोरिटी लिस्ट' तैयार की है। वर्तमान में उपलब्ध कमर्शियल स्टॉक को सबसे पहले अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को भेजा जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो उद्योगों और होटल-रेस्तरां जैसे खाद्य प्रतिष्ठानों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।