हरियाणा प्रॉपर्टी टैक्स पर सरकार का बड़ा फैसला, 15 साल के बकाया पर 100% ब्याज माफ, देखें आखिरी तारीख
May 16, 2026 11:40 AM
हरियाणा। हरियाणा के शहरों में रहने वाले लाखों मकान और दुकान मालिकों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने शहरी क्षेत्रों में लंबे समय से लंबित पड़े प्रॉपर्टी टैक्स (संपत्ति कर) को लेकर एक बेहद उदार फैसला किया है। शहरी स्थानीय निकाय विभाग (ULBD) की ओर से जारी ताजा नोटिफिकेशन के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2010-11 से लेकर 2024-25 तक के यानी पिछले 15 सालों के बकाया प्रॉपर्टी टैक्स पर लगने वाले ब्याज को 100 फीसदी माफ कर दिया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से कुछ दिन पहले की गई घोषणा को अब प्रशासनिक अमले ने अमलीजामा पहनाते हुए आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं।
30 जून 2026 तक का मौका, चूकने पर लगेगा पुराना जुर्माना
सरकार ने साफ किया है कि यह योजना सीमित समय के लिए ही लागू रहेगी। करदाताओं को इस एकमुश्त छूट (वन-टाइम वेवर) का लाभ उठाने के लिए 30 जून 2026 तक अपने हिस्से की मूल टैक्स राशि सरकारी खजाने में जमा करानी होगी। अगर कोई संपत्ति मालिक इस तय समय सीमा के भीतर अपना बकाया नहीं चुकाता है, तो डेडलाइन खत्म होते ही पुरानी व्यवस्था दोबारा लागू हो जाएगी। इसके तहत लंबित टैक्स राशि पर पहले की तरह ही 1.5 प्रतिशत प्रति माह की दर से भारी-भरकम ब्याज और जुर्माना जुड़ना शुरू हो जाएगा।
₹1500 करोड़ के भंवर में फंसा है सिस्टम, इन शहरों को सीधा फायदा
विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो हरियाणा के शहरी निकायों में करीब 18 से 20 लाख संपत्तियां रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से लगभग 4 से 5 लाख यूनिट्स ऐसी हैं जिन पर लंबे समय से टैक्स का भुगतान नहीं हुआ है। ब्याज और जुर्माने की रकम को मिला दिया जाए तो यह कुल आंकड़ा ₹1,500 करोड़ रुपये से ऊपर जा चुका है। इस फैसले के बाद अकेले करदाताओं को ₹200 से ₹400 करोड़ रुपये की सीधी बचत होगी। योजना का सीधा लाभ गुरुग्राम, फरीदाबाद, करनाल, पानीपत, हिसार, रोहतक और अंबाला जैसे बड़े नगर निगमों सहित तमाम नगर परिषदों और पालिकाओं के रिहायशी, कमर्शियल और इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी मालिकों को मिलेगा।
पोर्टल पर डेटा अपडेट करना जरूरी, विवादों से मिलेगी मुक्ति
ब्याज माफी का फायदा उठाने के लिए केवल पैसे जमा करना ही काफी नहीं होगा, बल्कि करदाताओं को एक तकनीकी प्रक्रिया से भी गुजरना होगा। संपत्ति मालिकों को विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर लॉगिन करके अपने प्लॉट का सही क्षेत्रफल, मौजूदा उपयोग (कमर्शियल या रेजिडेंशियल) और मालिकाना हक से जुड़े विवरण को खुद सत्यापित (सेल्फ-सर्टिफाई) करना अनिवार्य किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस कवायद से न केवल आम जनता का सालों पुराना वित्तीय बोझ कम होगा, बल्कि निकायों का रिकॉर्ड भी पूरी तरह डिजिटल व अपडेट हो जाएगा, जिससे भविष्य में गलत टैक्स असेसमेंट या कानूनी विवादों की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।