हरियाणा ने स्वास्थ्य में रचा इतिहास: एनीमिया मुक्त भारत अभियान में देश में मिला दूसरा स्थान, पांचवें पायदान से लगाई लंबी छलांग
May 16, 2026 11:56 AM
हरियाणा। हरियाणा ने स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण के मोर्चे पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'एनीमिया मुक्त भारत' (AMB) मुहिम के तहत जारी ताजा रैंकिंग में हरियाणा देश भर में दूसरे पायदान पर पहुंच गया है। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने इस कामयाबी की आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि राज्य ने एएमबी इंडेक्स में 86.5 अंकों के साथ शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले साल हरियाणा इस सूची में पांचवें स्थान पर था, जहां से सुधार करते हुए राज्य ने इस बार लंबी छलांग लगाई है।
बहुआयामी रणनीति और डिजिटल ट्रैकिंग ने बदली तस्वीर
चंडीगढ़ में इस सफलता के पीछे की कड़ियों को साझा करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि यह मुकाम किसी एक प्रयास से नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और बहुआयामी रणनीति के चलते हासिल हुआ है। प्रदेश सरकार ने इसके लिए विशेष तौर पर 'एनीमिया उन्मूलन माह' और '100 दिवसीय एनीमिया नियंत्रण अभियान' जैसी आक्रामक जमीनी योजनाएं चलाईं। इसके साथ ही, विभाग ने खुद का एक विशेष 'एनीमिया ट्रैकिंग वेब एप्लीकेशन' तैयार किया, जिससे हर जिले और ब्लॉक स्तर पर दवाओं के वितरण और मरीजों के डेटा का सटीक प्रबंधन किया गया। इसी डिजिटल निगरानी की वजह से कागजी आंकड़ों के बजाय जमीनी स्तर पर शत-प्रतिशत काम संभव हो सका।
पांच मोर्चों पर कड़ा टेस्ट, राष्ट्रीय औसत को पछाड़ा
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी होने वाले इस स्कोर कार्ड में आयरन और फोलिक एसिड (IFA) की खुराक की कवरेज को बेहद बारीकी से परखा जाता है। इसके लिए पांच प्रमुख श्रेणियां तय की गई हैं, जिनमें 6 से 59 महीने के नवजात, 5 से 9 साल के स्कूली बच्चे, 10 से 19 साल के किशोर-किशोरी, गर्भवती महिलाएं और नवजात को स्तनपान कराने वाली माताएं शामिल हैं। हरियाणा का प्रदर्शन इन सभी श्रेणियों में बेमिसाल रहा है। पूरे देश का राष्ट्रीय औसत जहां 65.4 अंकों पर सिमट गया है, वहीं हरियाणा ने 86.5 अंक हासिल कर साबित कर दिया कि वह देश के अग्रणी राज्यों से कहीं आगे निकल चुका है।
बच्चों और माताओं की सेहत सुधरी, लगातार बना हुआ है रिकॉर्ड
इस अभियान का सबसे सुखद पहलू यह है कि हरियाणा उन गिने-चुने राज्यों की कतार में खड़ा हो गया है, जहां पिछले कई सालों से 5 से 9 साल के स्कूली बच्चों और गर्भवती महिलाओं में आयरन-फोलिक एसिड की कवरेज 95 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है। इसके अलावा, स्तनपान कराने वाली माताओं में भी फोलिक एसिड की कवरेज वित्तीय वर्ष 2024-25 के 72.3 प्रतिशत के मुकाबले वर्ष 2025-26 में बढ़कर 72.8 प्रतिशत पर पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के लगातार प्रयासों से न केवल एनीमिया की दर में भारी गिरावट आएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी का स्वास्थ्य भी सुरक्षित होगा।