राशन कार्ड धारकों के लिए बड़ी खबर: अब पूरा मिलेगा अनाज, डिपो पर शुरू होने जा रही नई व्यवस्था
Mar 28, 2026 3:20 PM
हरियाणा। हरियाणा के गरीबों के हक पर डाका डालने वाले डिपो होल्डर्स के लिए अब मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। प्रदेश की नायब सैनी सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पूरी तरह 'लीक-प्रूफ' बनाने के लिए एक बड़ा दांव खेला है। अब राशन की दुकानों पर अनाज की बोरियां उतरने से लेकर उपभोक्ताओं के थैलों में जाने तक की हर गतिविधि कैमरे की जद में होगी। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने राज्य के करीब 9,000 डिपो को सीसीटीवी कैमरों से लैस करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। इस पहल के बाद अब कोई भी डिपो होल्डर न तो स्टॉक छिपा पाएगा और न ही उपभोक्ताओं को कम राशन देकर गुमराह कर सकेगा।
पंचकूला के 'सफल प्रयोग' ने दिखाया रास्ता
इस योजना को पूरे प्रदेश में लागू करने से पहले विभाग ने पंचकूला में इसका पायलट प्रोजेक्ट चलाया था। करीब 45 दिनों तक एक डिपो पर लगे कैमरों की फीड ने विभाग को चौंकाने वाले और सकारात्मक परिणाम दिए। अधिकारियों ने पाया कि कैमरे की निगरानी में न केवल राशन वितरण का समय सुधरा, बल्कि स्टॉक में होने वाली हेराफेरी पर भी पूरी तरह लगाम लग गई। इसी सफल ट्रायल की रिपोर्ट के आधार पर अब सरकार ने 150 से 200 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित करने का मन बनाया है।
कैसे काम करेगी यह नई व्यवस्था?
प्रत्येक राशन डिपो पर दो रणनीतिक स्थानों पर कैमरे फिट किए जाएंगे:
वितरण स्थल: यहां से यह सुनिश्चित होगा कि बायोमेट्रिक मशीन पर अंगूठा लगवाने के बाद लाभार्थी को पूरा अनाज मिल रहा है या नहीं।
स्टोर/गोदाम: यहां की निगरानी से यह पता चलेगा कि डिपो में कितना राशन आया और कितना स्टॉक वास्तव में बचा हुआ है।
इन कैमरों की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इनका कंट्रोल रूम जिला स्तर के साथ-साथ मुख्यालय में भी होगा। यानी अगर कहीं से भी शिकायत आती है, तो अधिकारी दफ्तर में बैठकर ही उस समय की फुटेज खंगाल सकेंगे।
लाभार्थियों को मिलेगा हक: राज्य मंत्री राजेश नागर की दो टूक
खाद्य एवं आपूर्ति राज्य मंत्री राजेश नागर ने इस योजना को सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का हिस्सा बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अप्रैल माह में टेंडर जारी कर दिए जाएंगे और सरकार का लक्ष्य अगले तीन महीनों के भीतर यानी मानसून से पहले-पहले सभी डिपो पर कैमरे इंस्टॉल करने का है। वर्तमान में प्रदेश के करीब डेढ़ करोड़ लोग सरकारी राशन पर निर्भर हैं। सरकार का मानना है कि इस डिजिटल निगरानी से न केवल भ्रष्टाचार खत्म होगा, बल्कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली अधिक ईमानदार और पारदर्शी बनेगी।