सावधान! 14 मई को कैथल में मॉक ड्रिल, आपदा के समय कैसे बचें, प्रशासन दिखाएगा 'लाइव' डेमो
May 12, 2026 5:50 PM
कैथल। बाढ़ की विभीषिका झेलने वाले इलाकों के लिए पूर्व तैयारी ही बचाव का सबसे बड़ा हथियार होती है। इसी सोच के साथ कैथल डीसी अपराजिता ने अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग कर 14 मई की कार्ययोजना पर मुहर लगाई है। सुबह 9 बजे जैसे ही मॉक ड्रिल का बिगुल बजेगा, प्रशासन यह देखेगा कि सूचना मिलने के कितनी देर बाद राहत और बचाव टीमें मौके पर पहुंचती हैं। इस पूरी कवायद का संचालन लघु सचिवालय में स्थापित किए जाने वाले अस्थायी 'डिस्ट्रिक्ट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर' से होगा, जहां से डीसी खुद हर गतिविधि पर पैनी नजर रखेंगी।
रणनीति: दो जगहों पर होगा बचाव का 'लाइव' डेमो
प्रशासन ने अभ्यास के लिए दो संवेदनशील बिंदु चुने हैं—पहला कमेटी चौक स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और दूसरा लघु सचिवालय परिसर का सरल केंद्र। इन दोनों ही जगहों पर ऐसी परिस्थितियां पैदा की जाएंगी जो बाढ़ के समय उत्पन्न होती हैं। एडीसी डॉ. सुशील कुमार को इस पूरी ड्रिल का इंचार्ज नियुक्त किया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 14 मई से पहले 'इंडिया डिजास्टर रिसोर्स नेटवर्क' पोर्टल पर अपने संसाधनों की लिस्ट अपडेट कर लें, ताकि जरूरत पड़ने पर यह पता रहे कि नाव, पंप और अन्य उपकरण कहां और कितनी संख्या में उपलब्ध हैं।
सिर्फ विभाग नहीं, आम जनता और स्वयंसेवक भी होंगे ढाल
डीसी अपराजिता ने स्पष्ट किया कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी मशीनरी का काम नहीं है। इसीलिए इस मॉक ड्रिल में रेडक्रॉस, एनसीसी, एनएसएस, नेहरू युवा केंद्र और स्थानीय एनजीओ के आपदा मित्रों को भी जोड़ा गया है। अभ्यास के दौरान न केवल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जाएगा, बल्कि प्रभावितों के लिए बनाए जाने वाले 'राहत शिविरों' की व्यवस्था का भी डेमो होगा। भोजन, दवाइयां और ठहरने के इंतजामों को लेकर विभिन्न विभागों को उनकी जिम्मेदारियां बांट दी गई हैं।
तैयारी का मकसद: तालमेल में न रह जाए कोई कमी
अक्सर देखा जाता है कि आपदा के वक्त विभागों के बीच समन्वय की कमी भारी पड़ जाती है। इस ड्रिल के जरिए स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, सिंचाई विभाग और जनस्वास्थ्य विभाग के बीच के तालमेल की कमियों को पहचाना जाएगा। डीसी ने कड़े लहजे में कहा कि सभी अधिकारी अपने संसाधनों की सूची को दुरुस्त रखें और ड्रिल को पूरी गंभीरता से लें, ताकि वास्तविक संकट के समय किसी भी तरह की जनहानि को रोका जा सके।