Search

HAU हिसार की बड़ी कामयाबी: सरसों की नई हाइब्रिड किस्म RH-H 2101 लॉन्च, पैदावार में करेगी धमाका

Mar 18, 2026 4:03 PM

हरियाणा। हरियाणा की माटी और यहाँ के वैज्ञानिकों के पसीने ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित किया है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) ने सरसों की अपनी पहली हाइब्रिड किस्म 'RH-H 2101' को ईजाद कर लिया है। कुलपति प्रोफेसर बी.आर. कंबोज ने आज एक प्रेस वार्ता के दौरान इस उपलब्धि का खुलासा करते हुए बताया कि यह किस्म सिंचित क्षेत्रों के किसानों की किस्मत बदलने का दम रखती है। अब तक विश्वविद्यालय सरसों और राया की 25 उन्नत किस्में देश को समर्पित कर चुका है, लेकिन यह हाइब्रिड किस्म अपनी अधिक उपज क्षमता के कारण 'गेम चेंजर' मानी जा रही है।

उत्तर भारत के किसानों के लिए सौगात, 30 क्विंटल तक होगी पैदावार

इस हाइब्रिड किस्म को अखिल भारतीय समन्वित सरसों एवं राई अनुसंधान प्रोजेक्ट के तहत करीब तीन साल तक कड़े परीक्षणों से गुजारा गया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, 'RH-H 2101' किस्म हरियाणा के साथ-साथ पंजाब, दिल्ली, जम्मू और उत्तरी राजस्थान के उन इलाकों के लिए सबसे उपयुक्त है जहाँ सिंचाई की पुख्ता व्यवस्था है। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी पैदावार है, जो प्रति हेक्टेयर 28 से 30 क्विंटल तक जा सकती है। इसके साथ ही इसमें तेल की मात्रा भी सामान्य किस्मों के मुकाबले काफी अधिक पाई गई है, जिससे बाजार में किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम मिल सकेगा।

खाद्य तेल के आयात पर लगेगी लगाम, आत्मनिर्भर बनेगा भारत

कुलपति प्रोफेसर कंबोज ने तिलहन और दलहन मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि भारत आज भी खाद्य तेलों की जरूरत पूरी करने के लिए विदेशों को लाखों करोड़ रुपये चुकाता है। ऐसी हाइब्रिड किस्में न केवल देश का पैसा बचाएंगी बल्कि 'अन्नदाता' की आर्थिक स्थिति में भी बड़ा सुधार लाएंगी।

गौरतलब है कि HAU की इस सरसों टीम को पिछले 12 सालों में चार बार 'सर्वश्रेष्ठ केंद्र' के अवार्ड से नवाजा जा चुका है। वैज्ञानिकों की इस 12 साल की कड़ी तपस्या का फल अब खेतों में पीली चादर के रूप में लहलहाएगा, जो न केवल मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखेगा बल्कि किसानों के घरों में समृद्धि के द्वार भी खोलेगा।

You may also like:

Please Login to comment in the post!