ओलंपियन विनेश फोगाट का कबूलनामा: बृजभूषण सिंह पर आरोप लगाने वाली 6 पहलवानों में मैं भी शामिल
May 03, 2026 4:43 PM
चंडीगढ़ (जग मार्ग)। भारतीय कुश्ती के गलियारों में एक बार फिर भूचाल आ गया है। इस बार हमला किसी विपक्षी या संघ के अधिकारी ने नहीं, बल्कि देश की गौरवशाली पहलवान विनेश फोगाट ने किया है। विनेश ने सोशल मीडिया पर एक भावुक और बेबाक वीडियो साझा करते हुए वह राज खोल दिया है, जिस पर अब तक सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की 'गोपनीयता' वाली परत चढ़ी हुई थी। विनेश ने पहली बार कैमरे के सामने स्वीकार किया कि बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने वाली उन छह महिला पहलवानों में उनकी अपनी पहचान भी शामिल है।
"गरिमा की खातिर थी खामोशी, मजबूरी ने तोड़ा सब्र"
विनेश ने वीडियो में अपनी बात रखते हुए कहा कि कानूनी तौर पर किसी भी पीड़ित की पहचान उजागर नहीं की जानी चाहिए, ताकि समाज में उसके सम्मान को ठेस न पहुंचे। उन्होंने कहा, "मैं अब तक इसलिए चुप थी क्योंकि मामला अदालत में विचाराधीन है और गवाहियां चल रही हैं। लेकिन आज जो हालात पैदा कर दिए गए हैं, उनमें मुझे सच कहना ही होगा। मैं स्वयं उन छह पीड़ितों में से एक हूँ जिन्होंने साहस जुटाकर शिकायत दर्ज कराई थी।" विनेश का यह बयान उन दावों को और मजबूती देता है, जिनके लिए जंतर-मंतर पर महीनों तक पहलवानों ने धूप और बारिश की परवाह किए बिना धरना दिया था।
मैदान पर वापसी और 'सिस्टम' का डर
सिर्फ पुरानी शिकायतों का जिक्र ही नहीं, विनेश ने अपनी आगामी प्रतिस्पर्धी वापसी को लेकर भी गंभीर चिंताएं जताई हैं। उन्होंने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि मैट पर उनकी वापसी में जानबूझकर रोड़े अटकाए जा रहे हैं। विनेश के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के गोंडा में होने वाले आगामी ट्रायल किसी निष्पक्ष स्थान के बजाय बृजभूषण सिंह के निजी स्वामित्व वाले कॉलेज में आयोजित किए जा रहे हैं।
क्या गोंडा में मिलेगा न्याय?
विनेश फोगाट ने इस चयन प्रक्रिया को पूरी तरह 'एकतरफा' करार देते हुए आरोप लगाया कि जिस व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हों, उसी के गढ़ में निष्पक्ष ट्रायल की उम्मीद करना बेमानी है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा, "उनका अपना निजी कॉलेज है और प्रतियोगिता वहीं हो रही है। ऐसे में यह मान लेना कि हर मेहनती एथलीट को उसका हक मिलेगा, नामुमकिन सा लगता है।" विनेश का यह खुलासा न केवल कुश्ती महासंघ के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है, बल्कि यह खेल और न्याय के बीच जारी उस लंबी लड़ाई को भी नया मोड़ दे रहा है, जिसकी गूंज पिछले एक साल से देश भर में सुनाई दे रही है।