भारतीय रेलवे का धमाका: जींद-सोनीपत ट्रैक पर हाइड्रोजन ट्रेन का दूसरा ट्रायल रहा सुपरहिट
Apr 24, 2026 3:24 PM
हरियाणा। भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। जींद-सोनीपत रेलखंड पर देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का दूसरा 'अग्नि-परीक्षा' का दौर उम्मीदों के मुताबिक रहा। गुरुवार सुबह जब ठीक 8 बजे यह आधुनिक ट्रेन जींद जंक्शन से सोनीपत के लिए रवाना हुई, तो रेलवे के इंजीनियरों और अधिकारियों की धड़कनें तेज थीं। हालांकि, सफर के दौरान ट्रेन ने जिस सुगमता और गति के साथ अपना प्रदर्शन किया, उससे अधिकारियों के चेहरे खिल गए। निर्धारित समय दोपहर 2 बजे ट्रेन वापस जींद जंक्शन लौट आई।
क्यों खास है यह हाइड्रोजन ट्रेन?
परंपरागत डीजल और इलेक्ट्रिक इंजनों के विकल्प के तौर पर हाइड्रोजन तकनीक को भविष्य की रेल माना जा रहा है। यह ट्रेन न केवल शोर मुक्त है, बल्कि इससे कार्बन उत्सर्जन शून्य होता है। रेलवे विशेषज्ञों की मानें तो दूसरे ट्रायल में मुख्य रूप से ट्रेन की ऊर्जा खपत, ब्रेकिंग सिस्टम और पटरियों के साथ इसके सामंजस्य की बारीकी से जांच की गई। अधिकारियों के अनुसार, दूसरे दिन का डेटा बेहद सकारात्मक रहा है और किसी भी प्रकार की तकनीकी खराबी देखने को नहीं मिली।
28 अप्रैल: अग्निपरीक्षा का आखिरी दिन
दूसरे ट्रायल की सफलता के बाद अब पूरा ध्यान आगामी 28 अप्रैल को होने वाले अंतिम परीक्षण पर है। इस दिन कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (CRS) खुद ट्रेन में मौजूद रहेंगे और सुरक्षा के हर बारीक पहलू की जांच करेंगे। रेलवे के नियमों के मुताबिक, नियमित यात्री सेवा शुरू करने के लिए सीआरएस का प्रमाणपत्र अनिवार्य है। यदि 28 अप्रैल को ग्रीन सिग्नल मिल जाता है, तो जींद-सोनीपत रूट देश का ऐसा पहला रेल मार्ग बन जाएगा जहां हाइड्रोजन ट्रेनें पटरी पर दौड़ेंगी।
रेलवे के 'नेट जीरो' लक्ष्य की ओर कदम
भारतीय रेलवे ने साल 2030 तक 'नेट जीरो कार्बन एमिटर' बनने का लक्ष्य रखा है। हाइड्रोजन ट्रेन का यह सफल प्रयोग उसी लक्ष्य की ओर बढ़ता हुआ एक बड़ा कदम है। जींद-सोनीपत मार्ग पर सफलता मिलने के बाद इसे कालका-शिमला जैसे पहाड़ी और पर्यटन स्थलों वाले रूटों पर भी चलाने की योजना है। फिलहाल, रेलवे अधिकारियों और आम जनता को बस उस आधिकारिक घोषणा का इंतजार है, जब यह ट्रेन अपनी नियमित सेवाएं शुरू करेगी।