3 साल से 5000 एकड़ में भरा पानी, आकेड़ा झील के आसपास खेती पूरी तरह ठप
Apr 24, 2026 5:19 PM
मेवात। मेवात की धरती पर खेती का दम भरने वाले किसान आज अपनी ही तकदीर पर आंसू बहा रहे हैं। नूंह जिले की प्रसिद्ध आकेड़ा झील के आसपास का इलाका पिछले तीन सालों से टापू में तब्दील हो चुका है। झील का जलस्तर कम होने का नाम नहीं ले रहा, जिसका खामियाजा आसपास के 5 से 6 गांवों के किसानों को अपनी 5000 एकड़ जमीन गंवाकर भुगतना पड़ रहा है। जहां कभी गेहूं और सरसों की लहलहाती फसलें नजर आती थीं, वहां आज केवल जलकुंभी और जमा हुआ गंदा पानी दिखाई देता है।
खुद की जमीन, फिर भी राशन की कतार में किसान
त्रासदी की पराकाष्ठा यह है कि जिन किसानों के खलिहान कभी अनाज से भरे रहते थे, आज वे खुद सरकारी राशन और बाजार के अनाज पर निर्भर हैं। आकेड़ा गांव के पीड़ित किसान खुर्शीद का दर्द छलक पड़ा, उन्होंने बताया कि तीन साल से खेत क्या होते हैं, हम भूल चुके हैं। जमीन का मालिक होने के बावजूद हमें पेट भरने के लिए दूसरों का मोहताज होना पड़ रहा है। न फसल हुई, न सरकार ने मुआवजे का एक रुपया हमारे खाते में डाला। ऊपर से अरावली की पहाड़ियों से आने वाले नीलगाय और अन्य जंगली जानवर बची-खुची हरियाली को भी सफाचट कर रहे हैं।
आश्वासनों की राजनीति और धरातल की हकीकत
किसानों का आरोप है कि जलभराव की इस गंभीर समस्या पर जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने केवल 'सियासी पर्यटन' किया है। नेता आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और समस्या समाधान का वादा करके चले जाते हैं। लेकिन धरातल पर पानी की निकासी के लिए आज तक एक नाली भी नहीं खोदी गई। ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह ठप पड़ा है, जिसके कारण बारिश का पानी महीनों तक खेतों में सड़ता रहता है। इससे न केवल खेती बर्बाद हो रही है, बल्कि इलाके में संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
बड़े आंदोलन की सुगबुगाहट: 'अब और सब्र नहीं'
प्रशासनिक उपेक्षा से आजिज आकर अब नूंह के किसानों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। किसान आस मोहम्मद ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि किसान अब और इंतजार करने के मूड में नहीं हैं। हमारी मांग स्पष्ट है—या तो खेतों से पानी निकालने का स्थायी प्रबंध किया जाए या फिर पिछले तीन सालों का फसल खराबा (मुआवजा) तुरंत जारी हो। यदि आगामी कुछ दिनों में सरकार ने कोई ठोस नीति पेश नहीं की, तो नूंह के किसान सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।