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दशकों का इंतजार खत्म: नूंह-अलवर हाईवे के फोरलेन को मिली हरी झंडी, 'खूनी सड़क' के दाग से मिलेगी मुक्ति

Mar 12, 2026 10:33 AM

हरियाणा।  मेवात की लाइफलाइन कहे जाने वाले नूंह-अलवर हाईवे को लेकर आखिरकार वो खबर आ ही गई, जिसका इस इलाके की तीन पीढ़ियों ने इंतजार किया है। केंद्र सरकार के वन और पर्यावरण मंत्रालय ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए 113 एकड़ वन भूमि के डायवर्जन को सशर्त मंजूरी दे दी है। इस एक साइन के साथ ही नूंह से राजस्थान सीमा तक सड़क को फोरलेन बनाने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि उस लंबे जन-संघर्ष की जीत है जिसने दिल्ली के गलियारों तक अपनी गूंज पहुंचाई थी।

प्रोजेक्ट की रूपरेखा: 480 करोड़ का बजट और 46 किमी का सफर

गुरुग्राम-अलवर नेशनल हाईवे के नूंह से राजस्थान बॉर्डर (नौगावां) तक के 46 किलोमीटर लंबे हिस्से को अब आधुनिक फोरलेन में तब्दील किया जाएगा। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने पिछले साल ही इस काम के लिए 480.44 करोड़ रुपये के बजट पर मुहर लगा दी थी, लेकिन पेच वन विभाग की एनओसी (NOC) में फंसा था।

प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं:

चौड़ीकरण: मौजूदा संकरी सड़क को अब मानक फोरलेन में बदला जाएगा।

नए बाईपास: भारी वाहनों और ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए भादस और मालब गांवों के ऊपर से बाईपास का निर्माण होगा।

कनेक्टिविटी: यह सड़क न केवल हरियाणा और राजस्थान को जोड़ेगी, बल्कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के साथ इस पूरे बेल्ट की कनेक्टिविटी को सुधारेगी।

'खूनी सड़क' के कलंक को धोने की कोशिश

नूंह-अलवर रोड को पिछले डेढ़ दशक से 'खूनी सड़क' के नाम से जाना जाता है। संकरी सड़क और राजस्थान की ओर जाने वाले ओवरलोडेड डंपरों के दबाव के कारण यहां आए दिन हादसे होते रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो बीते 15 वर्षों में इस मार्ग पर 2,000 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

इस खौफनाक मंजर को बदलने के लिए इलाके के लोगों ने एक अनोखा आंदोलन चलाया था। करीब 20 हजार लोगों के हस्ताक्षरों वाला 100 फीट लंबा कपड़ा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजकर इस सड़क को चौड़ा करने की गुहार लगाई गई थी। आज जब वन विभाग की मंजूरी की खबर आई, तो स्थानीय संघर्ष समिति के सदस्यों की आंखों में खुशी के आंसू साफ देखे जा सकते थे।

आर्थिक तरक्की के खुलेंगे द्वार

इस सड़क के बनने से केवल सफर ही सुरक्षित नहीं होगा, बल्कि नूंह जैसे पिछड़े जिले की तकदीर और तस्वीर भी बदल सकती है। रोजगार और उद्योग: बेहतर कनेक्टिविटी होने से नूंह और आसपास के इलाकों में नए लॉजिस्टिक हब और उद्योग स्थापित होने की उम्मीद है।

पर्यटन: अरावली की तलहटी में स्थित इस क्षेत्र में टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें अच्छी सड़कों के अभाव में अब तक पंख नहीं लग पाए थे। रियल एस्टेट: एनसीआर का हिस्सा होने के नाते, फोरलेन बनने से जमीन की कीमतों में उछाल और बुनियादी ढांचे का विकास तेजी से होगा।

टेंडर प्रक्रिया 21 जनवरी को ही मुकम्मल हो चुकी है। अब निर्माण एजेंसी को वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत 'परिवेश पोर्टल' पर वनीकरण की राशि जमा करानी होगी। जैसे ही यह औपचारिकता पूरी होगी, धरातल पर मशीनों की गूंज सुनाई देने लगेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ महीनों में निर्माण कार्य पूरी रफ्तार पकड़ लेगा।

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